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प्रकाश: परावर्तन, अपवर्तन, लेंस और मानव नेत्र — संपूर्ण परीक्षा मार्गदर्शिका

प्रकाशिकी (Optics) के मूल सिद्धांत, दर्पण व लेंस के नियम, मानव नेत्र की कार्यप्रणाली, प्रमुख दृष्टि दोष और उनके निवारण पर आधारित विस्तृत अध्ययन सामग्री।

⭐ मुख्य बिंदु

  • प्रकाश एक अनुप्रस्थ विद्युतचुंबकीय तरंग है, जिसकी निर्वात में चाल सर्वाधिक 3 × 10^8 मी/से होती है।
  • समतल दर्पण में पूरा प्रतिबिंब देखने के लिए दर्पण की ऊंचाई व्यक्ति की ऊंचाई की कम से कम आधी होनी चाहिए।
  • वाहनों के साइड मिरर में उत्तल दर्पण तथा हेडलाइट व शेविंग में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है।
  • तारों का टिमटिमाना और पेंसिल का मुड़ा दिखना प्रकाश के अपवर्तन के प्रमुख उदाहरण हैं।
  • हीरे की चमक, मरीचिका और ऑप्टिकल फाइबर पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR) के सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
  • नेत्रदान में कॉर्निया का प्रत्यारोपण किया जाता है, जबकि आँख का रंग आइरिस द्वारा निर्धारित होता है।
  • रेटिना पर वस्तु का प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा बनता है, जिसकी न्यूनतम स्पष्ट दृष्टि दूरी 25 सेमी है।
  • निकट दृष्टि दोष (Myopia) के निवारण हेतु अवतल लेंस और दूर दृष्टि दोष हेतु उत्तल लेंस प्रयुक्त होता है।

प्रकाशिकी (Optics) का परिचय और प्रकाश की प्रकृति

भौतिक विज्ञान में प्रकाश (Light) ऊर्जा का वह रूप है जो हमारी आँखों में दृष्टि की संवेदना उत्पन्न करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे RRB Group D, ALP, SSC CGL/CHSL और राज्य PCS) में प्रकाशिकी से जुड़े सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

  • तरंग व कण प्रकृति: प्रकाश एक विद्युतचुंबकीय तरंग (Electromagnetic Wave) है, जिसे संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। यह अनुप्रस्थ तरंग (Transverse Wave) की भांति व्यवहार करती है। डी-ब्रोग्ली के अनुसार प्रकाश में द्वैत प्रकृति (Dual Nature — तरंग और कण दोनों) पाई जाती है। प्रकाश के कण रूप को फोटॉन (Photon) कहते हैं।
  • प्रकाश का वेग: सर्वप्रथम रोमर (Ole Rømer) ने 1676 ई. में प्रकाश की चाल की गणना की थी। निर्वात (Vacuum) में प्रकाश की चाल सर्वाधिक 3 × 108 मीटर/सेकंड (लगभग 3 लाख किमी/सेकंड) होती है।
  • माध्यम और प्रकाश की चाल: जिस माध्यम का प्रकाशिक घनत्व जितना अधिक होता है, उसमें प्रकाश की चाल उतनी ही घट जाती है।

प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)

जब प्रकाश की किरण किसी चिकनी या पॉलिशदार सतह (जैसे दर्पण) से टकराकर पुनः उसी माध्यम में लौट जाती है, तो इस परिघटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

परावर्तन के दो मौलिक नियम

  1. प्रथम नियम: आपतित किरण (Incident Ray), परावर्तित किरण (Reflected Ray) तथा आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब (Normal) तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं।
  2. द्वितीय नियम: आपतन कोण (Angle of Incidence, ∠i) सदैव परावर्तन कोण (Angle of Reflection, ∠r) के बराबर होता है, अर्थात् ∠i = ∠r।

समतल दर्पण (Plane Mirror) से जुड़े प्रमुख नियम

  • समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव आभासी (Virtual) और सीधा (Erect) होता है।
  • प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बिल्कुल बराबर होता है और वस्तु दर्पण से जितनी आगे होती है, प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है।
  • पार्श्व व्युत्क्रमण (Lateral Inversion): वस्तु का दायाँ भाग बायाँ तथा बायाँ भाग दायाँ दिखाई देता है।
  • किसी व्यक्ति को अपना पूरा प्रतिबिंब देखने के लिए समतल दर्पण की न्यूनतम लंबाई व्यक्ति की ऊंचाई की आधी (h/2) होनी चाहिए।
  • यदि दो समतल दर्पण परस्पर θ कोण पर रखे हों, तो उनके बीच रखी वस्तु के बनने वाले प्रतिबिंबों की संख्या n = (360/θ) - 1 (यदि 360/θ सम संख्या हो) होती है।

गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)

गोलीय दर्पण कांच के खोखले गोले का काटा गया भाग होते हैं, जिनकी एक सतह पर पारे या सिल्वर की कलई करके लाल ऑक्साइड का लेप कर दिया जाता है:

  • अवतल दर्पण (Concave Mirror / अभिसारी दर्पण): इसका परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर दबा (धंसा) होता है। यह अनंत से आने वाली समानांतर किरणों को एक बिंदु पर सिकोड़ता (अभिसारित करता) है।
  • उत्तल दर्पण (Convex Mirror / अपसारी दर्पण): इसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर उभरा होता है। यह किरणों को फैलाता (अपसारित करता) है।

गोलीय दर्पण के उपयोग

दर्पण का प्रकारप्रमुख उपयोगवैज्ञानिक कारण
अवतल दर्पण (Concave)हजामत/शेविंग दर्पण, दंत चिकित्सकों (Dentists) द्वारा, गाड़ियों की हेडलाइट और सर्चलाइट, सोलर कुकरयह पास रखी वस्तु का बड़ा, सीधा और आभासी प्रतिबिंब बनाता है; तथा फोकस पर रखे प्रकाश स्रोत से समानांतर किरण पुंज देता है।
उत्तल दर्पण (Convex)वाहनों का पश्च-दृश्य दर्पण (Rear-view mirror), सोडियम परावर्तक लैंप, सुपरमार्केट व तीखे मोड़ों पर सुरक्षा दर्पणयह सदैव सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है तथा इसका दृष्टि-क्षेत्र (Field of View) बहुत विस्तृत होता है।

प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)

जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछी प्रवेश करती है, तो दोनों माध्यमों को अलग करने वाले तल पर वह अपने मूल मार्ग से विचलित हो जाती है। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं। अपवर्तन का मुख्य कारण विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल का अलग-अलग होना है।

  • विरल से सघन माध्यम (Rarer to Denser): जब किरण हवा से कांच या पानी में जाती है, तो उसकी चाल कम हो जाती है और वह अभिलंब की ओर झुक जाती है।
  • सघन से विरल माध्यम (Denser to Rarer): जब किरण कांच या पानी से हवा में जाती है, तो उसकी चाल बढ़ जाती है और वह अभिलंब से दूर हट जाती है।

स्नैल का नियम (Snell’s Law)

किन्हीं दो माध्यमों और एक ही रंग के प्रकाश के लिए आपतन कोण की ज्या (sin i) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sin r) का अनुपात एक स्थिरांक होता है:

sin i / sin r = μ (अपवर्तनांक / Refractive Index)

दैनिक जीवन में अपवर्तन के उदाहरण

  • द्रव में तिरछी डूबी हुई छड़ी या पेंसिल का मुड़ा हुआ और छोटा दिखाई देना।
  • पानी से भरे बर्तन या तालाब की तली (तल) का अपनी वास्तविक गहराई से ऊपर उठा हुआ दिखाई देना।
  • पानी के भरे गिलास में पड़ा सिक्का अपनी वास्तविक स्थिति से ऊपर उठा हुआ प्रतीत होना।
  • तारों का टिमटिमाना: पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न परतों का तापमान व घनत्व लगातार बदलने के कारण वायुमंडलीय अपवर्तन होता है, जिससे तारे टिमटिमाते नजर आते हैं।
  • अग्रिम सूर्योदय और विलंबित सूर्यास्त: वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य वास्तव में क्षितिज से ऊपर आने से 2 मिनट पहले ही दिखने लगता है और सूर्यास्त के 2 मिनट बाद तक दिखता रहता है। इस प्रकार दिन की अवधि 4 मिनट बढ़ जाती है।

पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection - TIR)

जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जा रही हो और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक हो जाए, तो किरण दूसरे माध्यम में अपवर्तित होने के बजाय संपूर्ण रूप से परावर्तित होकर उसी सघन माध्यम में लौट आती है। इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।

TIR की दो अनिवार्य शर्तें

  1. प्रकाश की किरण सदैव सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जानी चाहिए।
  2. सघन माध्यम में आपतन कोण (i) का मान संबंधित माध्यम के क्रांतिक कोण (C) से अधिक होना चाहिए (i > C)।

दैनिक जीवन और तकनीकी अनुप्रयोग

  • हीरे की अत्यधिक चमक: हीरे का अपवर्तनांक बहुत अधिक (2.42) होता है, जिसके कारण इसका क्रांतिक कोण बहुत कम (लगभग 24.4°) होता है। जब प्रकाश इसमें प्रवेश करता है, तो इसके विशेष तराशे गए फलकों से बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है।
  • मरीचिका (Mirage): गर्मियों में रेगिस्तान या डामर की पक्की सड़कों पर दूर जल होने का भ्रम होना।
  • ऑप्टिकल फाइबर (प्रकाशीय तंतु): दूरसंचार में डेटा को प्रकाश सिग्नलों के रूप में बिना ऊर्जा ह्रास के तीव्र गति से भेजने हेतु प्रयुक्त केबल पूर्ण आंतरिक परावर्तन पर कार्य करती है। इसका आविष्कार नरेंद्र सिंह कपानी ने किया था।
  • एंडोस्कोपी (Endoscopy): चिकित्सा क्षेत्र में शरीर के आंतरिक अंगों की जांच के लिए प्रयुक्त एंडोस्कोप TIR सिद्धांत पर काम करता है।

लेंस (Lenses) और उनकी क्षमता

लेंस दो पृष्ठों से घिरा हुआ एक पारदर्शी माध्यम होता है जिसका कम से कम एक पृष्ठ गोलीय होता है।

  • उत्तल लेंस (Convex Lens): यह बीच में मोटा और किनारों पर पतला होता है। यह समानांतर प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करता है, इसलिए इसे अभिसारी लेंस (Converging Lens) कहते हैं।
  • अवतल लेंस (Concave Lens): यह बीच में पतला और किनारों पर मोटा होता है। यह किरणों को फैलाता है, इसलिए इसे अपसारी लेंस (Diverging Lens) कहते हैं।

लेंस सूत्र एवं लेंस की क्षमता (Power of Lens)

लेंस सूत्र: 1/f = 1/v - 1/u (जहाँ f = फोकस दूरी, v = प्रतिबिंब की दूरी, u = वस्तु की दूरी)

किसी लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसरित या अपसरित करने की सामर्थ्य को लेंस की क्षमता (P) कहते हैं। यह फोकस दूरी के व्युत्क्रम के बराबर होती है:

P = 1 / f (मीटर में)
  • लेंस की क्षमता का SI मात्रक डायोप्टर (Dioptre, D) होता है।
  • उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक (+) तथा अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक (-) होती है। यदि किसी चश्मे का नंबर +2.0 D है, तो वह उत्तल लेंस है; यदि -1.5 D है, तो वह अवतल लेंस है।

मानव नेत्र: संरचना और कार्यप्रणाली

मानव नेत्र एक प्राकृतिक प्रकाशीय यंत्र है जो कैमरे की भांति कार्य करता है। मानव नेत्र गोलक (Eyeball) का व्यास लगभग 2.3 सेमी होता है।

नेत्र का भागसंरचना और कार्यपरीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
कॉर्निया (स्वच्छ पटल)नेत्र के सामने का पारदर्शी, उभरा हुआ झिल्लीनुमा भाग।नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश का अधिकांश अपवर्तन कॉर्निया की बाहरी सतह पर होता है। नेत्रदान (Eye Donation) में कॉर्निया का ही प्रत्यारोपण किया जाता है।
आइरिस (परितारिका)कॉर्निया के पीछे स्थित गहरा पेशीय डायफ्राम।यह पुतली (Pupil) के आकार को नियंत्रित करता है। मानव आँख का रंग (काला, भूरा, नीला) आइरिस के रंग पर निर्भर करता है।
पुतली (Pupil)आइरिस के केंद्र में स्थित छिद्र जो काला दिखाई देता है।नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा का नियमन करती है। मंद प्रकाश में फैल जाती है और तीव्र प्रकाश में सिकुड़ जाती है।
क्रिस्टलीय लेंसप्रोटीन से बना लचीला, पारदर्शी द्वि-उत्तल (Biconvex) लेंस।रेटिना पर वस्तु का वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनाता है।
पक्ष्माभी पेशियाँ (Ciliary Muscles)लेंस को जकड़े रखने वाली मांसपेशियाँ।लेंस की वक्रता और फोकस दूरी को आवश्यकतानुसार बदलकर समंजन क्षमता (Power of Accommodation) प्रदान करती हैं।
रेटिना (दृष्टि पटल)नेत्र के पिछले भाग में स्थित प्रकाश-सुग्राही पर्दा।इस पर वास्तविक एवं उल्टा प्रतिबिंब बनता है। इसमें दो प्रकार की कोशिकाएं होती हैं: शलाकाएं (Rods) जो प्रकाश की तीव्रता (मंद प्रकाश) हेतु और शंकु (Cones) जो रंगों की पहचान हेतु उत्तरदायी हैं।
पीत बिंदु (Yellow Spot / Fovea)रेटिना का केंद्र बिंदु।यहाँ सबसे स्पष्ट और तीक्ष्ण (Sharpest) प्रतिबिंब बनता है।
अंध बिंदु (Blind Spot)जहाँ दृष्टि तंत्रिका (Optic Nerve) रेटिना को छोड़कर मस्तिष्क में जाती है।यहाँ कोई प्रकाश सुग्राही कोशिका नहीं होती, अतः यहाँ बना प्रतिबिंब दिखाई नहीं देता।

दृष्टि परास (Range of Vision)

  • स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (निकट बिंदु): स्वस्थ नेत्र के लिए 25 सेमी होती है।
  • दूर बिंदु (Far Point): स्वस्थ नेत्र के लिए यह अनंत (Infinity) होता है।
  • दृष्टि का स्थायित्व (Persistence of Vision): रेटिना पर बने प्रतिबिंब का प्रभाव वस्तु हटने के बाद भी 1/16 सेकंड तक बना रहता है। सिनेमा और एनीमेशन इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं।

प्रमुख दृष्टि दोष एवं उनके निवारण

दोष का नामलक्षणशारीरिक कारणनिवारक लेंस
निकट दृष्टि दोष (Myopia)निकट की वस्तु साफ दिखती है, किंतु दूर की वस्तु स्पष्ट नहीं दिखती।नेत्र गोलक का लंबा हो जाना या लेंस की वक्रता/क्षमता बढ़ जाना। प्रतिबिंब रेटिना से पहले ही बन जाता है।अवतल लेंस (Concave Lens / Diverging)
दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia)दूर की वस्तु साफ दिखती है, किंतु पास की वस्तु (25 सेमी पर) स्पष्ट नहीं दिखती।नेत्र गोलक का छोटा हो जाना या लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाना। प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है।उत्तल लेंस (Convex Lens / Converging)
जरा दृष्टि दोष (Presbyopia)वृद्धावस्था में निकट और दूर दोनों की दृष्टि कमजोर हो जाना।पक्ष्माभी पेशियों की दुर्बलता तथा लेंस के लचीलेपन में कमी।द्विफोकसी लेंस (Bifocal Lens) — ऊपरी भाग अवतल और निचला भाग उत्तल।
अबिंदुकता (Astigmatism)एक ही दूरी पर रखी क्षैतिज (Horizontal) और ऊर्ध्वाधर (Vertical) रेखाएं एक साथ स्पष्ट नहीं दिखाई देतीं।कॉर्निया की वक्रता का असममित या अनियमित होना।बेलनाकार लेंस (Cylindrical Lens)
मोतियाबिंद (Cataract)दृष्टि धुंधली या पूर्णतः समाप्त हो जाना।उम्र बढ़ने पर क्रिस्टलीय लेंस का दूधिया या धुंधला हो जाना।शल्य चिकित्सा (Surgery द्वारा कृत्रिम Intraocular Lens प्रत्यारोपण)।
वर्णांधता (Colour Blindness)लाल और हरे रंग में भेद न कर पाना।रेटिना में शंकु (Cone) कोशिकाओं की जन्मजात कमी (यह एक आनुवंशिक रोग है)।इसका कोई प्रकाशीय लेंस द्वारा उपचार संभव नहीं है।

याद रखने की अचूक ट्रिक्स (Memory Tricks)

  • ट्रिक 1 (दोष और लेंस के अक्षरों की संख्या):
    • दू-र (2 अक्षर) दृष्टि दोष ➔ उ-त्त-ल (कम अक्षर / छोटा शब्द) लेंस।
    • नि-क-ट (3 अक्षर) दृष्टि दोष ➔ अ-व-त-ल (अधिक अक्षर / बड़ा शब्द) लेंस।
    • याद रखें: छोटे शब्द (दूर) के लिए छोटा नाम (उत्तल); बड़े शब्द (निकट) के लिए बड़ा नाम (अवतल)।
  • ट्रिक 2 (प्रतिबिंब कहाँ बनता है?):
    • निकट दृष्टि दोष में प्रतिबिंब रेटिना के निकट (सामने/पहले) बन जाता है।
    • दूर दृष्टि दोष में प्रतिबिंब रेटिना से दूर (पीछे) जाकर बनता है।
  • ट्रिक 3 (TIR के उदाहरण - 'म-ही-ऑ'):
    • म = मरीचिका (Mirage)
    • ही = हीरे की चमक (Diamond)
    • ऑ = ऑप्टिकल फाइबर (Optical Fibre) और एंडोस्कोपी

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है (PYQ Analysis & Exam Patterns)

विगत वर्षों के रेलवे (RRB Group D, NTPC, ALP) और SSC के प्रश्न पत्रों का विश्लेषण करने पर निम्नलिखित पैटर्न स्पष्ट रूप से उभरते हैं:

  • सीधे अनुप्रयोग आधारित प्रश्न: 'दाढ़ी बनाने के लिए कौन सा दर्पण प्रयोग होता है?' (उत्तर: अवतल दर्पण) या 'वाहनों के साइड मिरर में कौन सा दर्पण होता है?' (उत्तर: उत्तल दर्पण)। ये प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं।
  • नेत्रदान से जुड़े प्रश्न: बार-बार पूछा जाता है कि नेत्रदान के समय आँख का कौन सा भाग दान किया जाता है? (उत्तर: कॉर्निया)।
  • लेंस की क्षमता के न्यूमेरिकल: 'यदि किसी लेंस की फोकस दूरी 50 सेमी (उत्तल) है, तो उसकी क्षमता क्या होगी?'
    हल: P = 1/f = 1/0.5 m = +2 D। रेलवे में ऐसे सीधे 1-लाइनर न्यूमेरिकल हर शिफ्ट में आते हैं।
  • दृष्टि दोष और लेंस का मिलान: SSC CGL/CHSL और BPSC में अक्सर चारों दृष्टि दोष और उनके निवारक लेंसों का सुमेलित करने वाला (Match the Following) प्रश्न आता है।
  • अपवर्तन व TIR में अंतर: 'तारों का टिमटिमाना' वायुमंडलीय अपवर्तन है, जबकि 'हीरे का चमकना' या 'मरीचिका' पूर्ण आंतरिक परावर्तन (TIR) है। इसमें छात्र अक्सर भ्रमित होते हैं।

आधुनिक तकनीकी अनुप्रयोग

ऑप्टिक्स के यही सिद्धांत आज आधुनिक चिकित्सा और संचार क्रांति का आधार हैं:

  • लेसिक सर्जरी (LASIK): इसमें एक्सिमर लेजर का उपयोग करके कॉर्निया की मोटाई और वक्रता को सूक्ष्मता से नया आकार दिया जाता है, जिससे मायोपिया व हाइपरमेट्रोपिया वाले मरीजों का चश्मा पूरी तरह उतर जाता है।
  • इंट्राऑक्युलर लेंस (IOL): मोतियाबिंद के ऑपरेशन में फेकोइमल्सीफिकेशन तकनीक से प्राकृतिक धुंधले लेंस को हटाकर फोल्डेबल कृत्रिम लेंस (IOL) आंख में प्रत्यारोपित किया जाता है।
  • 5G और ब्रॉडबैंड ऑप्टिकल नेटवर्क: ऑप्टिकल फाइबर केबल में प्रकाश संकेत 'टोटल इंटरनल रिफ्लेक्शन' द्वारा टेराबिट्स प्रति सेकंड की गति से यात्रा करते हैं।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

निर्वात में प्रकाश की चाल3 × 10^8 मीटर/सेकंड
स्वस्थ आँख की न्यूनतम स्पष्ट दृष्टि दूरी25 सेमी
स्वस्थ आँख का दूर बिंदुअनंत (Infinity)
मानव नेत्र गोलक का व्यासलगभग 2.3 सेमी
दृष्टि का स्थायित्व (Persistence of Vision)1/16 सेकंड
हीरे का अपवर्तनांक व क्रांतिक कोणअपवर्तनांक = 2.42, क्रांतिक कोण = 24.4°
लेंस की क्षमता का SI मात्रकडायोप्टर (Dioptre, D = m^-1)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 वाहनों में पीछे का ट्रैफिक देखने के लिए (Rear-view mirror के रूप में) किस दर्पण का उपयोग किया जाता है?

Q2 नेत्रदान (Eye Donation) के समय दाता की आँख का कौन सा भाग प्रत्यारोपित किया जाता है?

Q3 मरीचिका (Mirage) का बनना और प्रकाशीय तंतु (Optical Fibre) का कार्य करना किस सिद्धांत पर आधारित है?

Q4 निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) से पीड़ित व्यक्ति के चश्मे में किस लेंस का प्रयोग किया जाता है?

Q5 यदि किसी उत्तल लेंस की फोकस दूरी +50 सेमी है, तो उस लेंस की क्षमता (Power) क्या होगी?

स्रोत