पुरस्कार एवं नियुक्तियाँ

जस्टिस संजीव खन्ना बने भारत के 51वें CJI और केरल का राजा रवि वर्मा सम्मान घोषित

जस्टिस संजीव खन्ना को भारत का 51वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है, वहीं केरल सरकार ने सी. डगलस और एन.एन. रिमज़ोन को राजा रवि वर्मा पुरस्कार से नवाजा।

⭐ मुख्य बिंदु

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत जस्टिस संजीव खन्ना को भारत का 51वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया।
  • जस्टिस संजीव खन्ना 11 नवंबर 2024 को पदभार ग्रहण करेंगे और उनका कार्यकाल 13 मई 2025 तक रहेगा।
  • जस्टिस खन्ना चुनावी बॉन्ड को रद्द करने और अनुच्छेद 370 से संबंधित ऐतिहासिक निर्णयों की संविधान पीठ में शामिल रहे हैं।
  • केरल सरकार ने दृश्य कला के सर्वोच्च 'राजा रवि वर्मा पुरस्कार' 2023 के लिए सी. डगलस और 2024 के लिए एन.एन. रिमज़ोन के नाम की घोषणा की।
  • राजा रवि वर्मा पुरस्कार के तहत ₹3 लाख नकद, प्रशस्ति पत्र और मूर्तिकार कनयी कुन्हीरामन द्वारा डिजाइन की गई प्रतिमा दी जाती है।
  • सी. डगलस मद्रास आर्ट मूवमेंट से जुड़े वरिष्ठ चित्रकार हैं, जबकि एन.एन. रिमज़ोन प्रख्यात समकालीन मूर्तिकार हैं।
  • 27 अक्टूबर को यूनेस्को द्वारा विश्व श्रव्य-दृश्य विरासत दिवस (WDAH) 'दुनिया के लिए आपकी खिड़की' थीम के साथ मनाया गया।

न्यायपालिका और भारतीय कला जगत से जुड़ी दो अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाएँ राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना को देश का अगला मुख्य न्यायाधीश (CJI) नियुक्त करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। इसके साथ ही केरल सरकार ने दृश्य कला (विजुअल आर्ट्स) के क्षेत्र में राज्य का सर्वोच्च सम्मान 'राजा रवि वर्मा पुरस्कार' वर्ष 2023 और 2024 के लिए घोषित किया है। प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से इन दोनों समसामयिक विषयों के संवैधानिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक पहलुओं का विश्लेषण अत्यंत आवश्यक है।

1. जस्टिस संजीव खन्ना बने भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश (CJI)

क्या हुआ?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना को भारत का 51वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। वे 11 नवंबर 2024 को पदभार ग्रहण करेंगे और वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 10 नवंबर 2024 को पूरा हो रहा है। जस्टिस खन्ना का कार्यकाल 13 मई 2025 तक रहेगा।

पृष्ठभूमि एवं न्यायिक यात्रा

14 मई 1960 को जन्मे जस्टिस संजीव खन्ना ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से विधि की उपाधि प्राप्त की और वर्ष 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में एक अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए। वर्ष 2005 में वे दिल्ली उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 2006 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। 18 जनवरी 2019 को उन्हें पदोन्नत कर सीधे उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया था। वे सुप्रीम कोर्ट में 450 से अधिक पीठों का हिस्सा रहे हैं और उन्होंने 115 से अधिक ऐतिहासिक निर्णय लिखे हैं।

  • महत्वपूर्ण निर्णय: वे चुनावी बॉन्ड (Electoral Bonds) योजना को असंवैधानिक घोषित करने वाली संविधान पीठ, अनुच्छेद 370 के निरसन को वैध ठहराने वाली पीठ, और संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह के 'अपरिवर्तनीय बिखराव' के आधार पर सीधे तलाक की अनुमति देने वाले ऐतिहासिक फैसलों में शामिल रहे हैं।
  • विधिक सहायता: वे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में भी ज़मीनी स्तर पर न्याय की पहुँच को सुगम बनाने के लिए कार्य कर चुके हैं।
  • ऐतिहासिक जुड़ाव: जस्टिस संजीव खन्ना उच्चतम न्यायालय के प्रख्यात पूर्व न्यायाधीश जस्टिस हंस राज खन्ना (HR Khanna) के भतीजे हैं, जिन्होंने वर्ष 1976 में आपातकाल के दौरान एडीएम जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला (बंदी प्रत्यक्षीकरण मामला) में नागरिक स्वतंत्रता के पक्ष में ऐतिहासिक असहमति (Dissenting Opinion) दर्ज की थी।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान

प्रावधान / अवधारणाविवरण व संवैधानिक संदर्भ
नियुक्ति का अनुच्छेदसंविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति की जाती है।
कार्यप्रणाली ज्ञापन (MoP)निवर्तमान CJI वरिष्ठता क्रम में अपने बाद के वरिष्ठतम न्यायाधीश के नाम की औपचारिक सिफारिश कानून मंत्रालय को भेजते हैं।
कार्यकाल व आयु सीमाअनुच्छेद 124(2) के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक पद पर बने रहते हैं।
पद की शपथसंविधान की तीसरी अनुसूची के तहत राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष शपथ ली जाती है।
मास्टर ऑफ रोस्टरमुख्य न्यायाधीश न्यायालय के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं और विभिन्न पीठों को मामलों के आवंटन का एकमात्र विशेषाधिकार रखते हैं।

2. केरल का प्रतिष्ठित राजा रवि वर्मा पुरस्कार (2023 और 2024) घोषित

क्या हुआ?

केरल सरकार के सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने दृश्य कला (Visual Arts) के क्षेत्र में राज्य के सर्वोच्च सम्मान 'राजा रवि वर्मा पुरस्कार' की घोषणा की है। वर्ष 2023 के लिए यह सम्मान आधुनिक कला आंदोलन के प्रख्यात चित्रकार सी. डगलस (C. Douglas) को और वर्ष 2024 के लिए विख्यात मूर्तिकार एन.एन. रिमज़ोन (N.N. Rimzon) को प्रदान किया जाएगा।

पुरस्कार का स्वरूप व चयन

प्रत्येक पुरस्कार विजेता को ₹3,00,000 (तीन लाख रुपये) की नकद राशि, एक प्रशस्ति पत्र और प्रसिद्ध मूर्तिकार कनयी कुन्हीरामन द्वारा विशेष रूप से डिजाइन की गई कांस्य प्रतिमा प्रदान की जाती है। सी. डगलस का चयन वरिष्ठ कलाकार पी. गोपीनाथ की अध्यक्षता वाली जूरी द्वारा किया गया, जबकि एन.एन. रिमज़ोन का चयन वरिष्ठ कलाकार पुष्पमाला एन. की अध्यक्षता वाली जूरी द्वारा संपन्न हुआ।

  • सी. डगलस (2023): 1951 में थालास्सेरी में जन्मे डगलस प्रसिद्ध 'मद्रास आर्ट मूवमेंट' के प्रमुख हस्ताक्षर हैं और चोलमंडल आर्टिस्ट्स विलेज से जुड़े रहे हैं। वे चाक, चारकोल और क्रेयॉन के माध्यम से अर्ध-अमूर्त रचनाओं द्वारा मानवीय संवेदनाओं और पीड़ा को चित्रित करने के लिए जाने जाते हैं।
  • एन.एन. रिमज़ोन (2024): 1957 में एर्नाकुलम में जन्मे रिमज़ोन भारत के अग्रणी समकालीन मूर्तिकारों में शुमार हैं। उन्होंने कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स, तिरुवनंतपुरम और रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट, लंदन से शिक्षा ली तथा भारतीय मूर्तिकला परंपरा को वैचारिक आयाम दिया।

स्टैटिक GK: राजा रवि वर्मा और उनका योगदान

राजा रवि वर्मा (1848–1906) को 'भारतीय आधुनिक कला का जनक' माना जाता है। उन्होंने यूरोपीय अकादमिक यथार्थवाद (ऑयल पेंटिंग और प्रकाश-छाया तकनीक) को भारतीय महाकाव्यों (रामायण, महाभारत) और पौराणिक कथाओं की विषयवस्तु के साथ संश्लेषित किया। वर्ष 1894 में उन्होंने मुंबई के निकट लोनावाला में भारत की पहली लिथोग्राफिक प्रिंटिंग प्रेस (Oleograph Press) स्थापित की, जिसने हिंदू देवी-देवताओं की कलाकृतियों को जन-जन तक पहुँचाकर कला का लोकतंत्रीकरण किया। उनकी प्रमुख कृतियों में 'दमयंती और हंस', 'शकुंतला', और 'सरस्वती' शामिल हैं।

3. विश्व श्रव्य-दृश्य विरासत दिवस (27 अक्टूबर)

महत्व एवं उद्देश्य

प्रतिवर्ष 27 अक्टूबर को संपूर्ण विश्व में यूनेस्को (UNESCO) और समन्वयक परिषद ऑफ ऑडियोविजुअल आर्काइव्स एसोसिएशंस (CCAAA) द्वारा 'विश्व श्रव्य-दृश्य विरासत दिवस' (World Day for Audiovisual Heritage - WDAH) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य चलचित्र, ध्वनि रिकॉर्डिंग, रेडियो और टेलीविज़न अभिलेखों के संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है। वर्ष 2024 का थीम 'दुनिया के लिए आपकी खिड़की' (Your Window to the World) निर्धारित किया गया है।

पृष्ठभूमि व भारत में प्रासंगिकता

27 अक्टूबर 1980 को यूनेस्को के 21वें आम सम्मेलन में 'चलती छवियों के संरक्षण और परिरक्षण की सिफारिश' पारित की गई थी। इसके स्मरण में वर्ष 2005 में इस दिवस की घोषणा की गई थी। भारत में ऐतिहासिक फिल्मों और ऑडियो अभिलेखों को सुरक्षित रखने का मुख्य दायित्व राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार (National Film Archive of India - NFAI, पुणे, स्थापित 1964) और प्रसार भारती अभिलेखागार के पास है, जो अब राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) के तहत डिजिटल रूप से संरक्षित किए जा रहे हैं।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

51वें मुख्य न्यायाधीशजस्टिस संजीव खन्ना
CJI नियुक्ति का संवैधानिक अनुच्छेदअनुच्छेद 124(2)
सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु65 वर्ष
राजा रवि वर्मा पुरस्कार 2023सी. डगलस (चित्रकार)
राजा रवि वर्मा पुरस्कार 2024एन.एन. रिमज़ोन (मूर्तिकार)
राजा रवि वर्मा पुरस्कार राशि₹3,00,000 (3 लाख रुपये)
विश्व श्रव्य-दृश्य विरासत दिवस27 अक्टूबर

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में किसे नियुक्त किया गया है?

Q2 भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं?

Q3 केरल सरकार द्वारा वर्ष 2024 के प्रतिष्ठित ‘राजा रवि वर्मा पुरस्कार’ के लिए किसे चुना गया है?

Q4 आधुनिक भारतीय चित्रकला के अग्रदूत राजा रवि वर्मा ने 1894 में अपनी ऐतिहासिक लिथोग्राफिक प्रेस कहाँ स्थापित की थी?

Q5 प्रतिवर्ष यूनेस्को द्वारा ‘विश्व श्रव्य-दृश्य विरासत दिवस’ (World Day for Audiovisual Heritage) किस तिथि को मनाया जाता है?

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