भारतीय संविधान की 12 अनुसूचियाँ: विषय, अनुच्छेद और याद रखने की आसान ट्रिक
भारतीय संविधान की सभी 12 अनुसूचियों को उनके संबंधित अनुच्छेद, विषय, प्रमुख संशोधनों और परीक्षा में पूछे जाने वाले अंतर सहित समझें। साथ में याद रखने की ट्रिक और अभ्यास प्रश्न।
⭐ मुख्य बिंदु
- भारतीय संविधान में कुल 12 अनुसूचियाँ हैं; मूल संविधान में 8 थीं।
- पहली अनुसूची राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के क्षेत्रीय विवरण से संबंधित है।
- सातवीं अनुसूची संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों में विधायी विषय बाँटती है।
- आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ हैं; यह संघ की राजभाषा का पर्याय नहीं है।
- दसवीं अनुसूची दल-बदल के आधार पर अयोग्यता से संबंधित है।
- ग्यारहवीं अनुसूची पंचायतों के 29 और बारहवीं नगरपालिकाओं के 18 विषय बताती है।
- पाँचवीं और छठी अनुसूची जनजातीय प्रशासन की अलग-अलग व्यवस्थाएँ हैं।
परिचय
भारतीय संविधान के मुख्य भागों के साथ दी गई अनुसूचियाँ ऐसी विस्तृत सूचियाँ और पूरक विवरण हैं, जिन्हें हर बार मूल अनुच्छेदों में विस्तार से लिखना आवश्यक नहीं था। इन्हें संविधान का अलग कानून या केवल परिशिष्ट न समझें: जहाँ संविधान किसी विषय का संबंध किसी अनुसूची से जोड़ता है, वहाँ वह अनुसूची संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा होती है। मूल संविधान में 8 अनुसूचियाँ थीं; अब कुल 12 हैं। बाद की चार अनुसूचियाँ संविधान संशोधनों से जोड़ी गईं।
परीक्षा में अक्सर दो तरह की गड़बड़ी कराई जाती है: एक, अनुसूची और उससे संबंधित अनुच्छेद का जोड़ा उलटना; दूसरी, मिलते-जुलते विषयों—जैसे चौथी और सातवीं, या पाँचवीं और छठी अनुसूची—को एक समझ लेना। इसलिए हर अनुसूची को उसके काम के साथ याद करें। नीचे दी गई सूची संविधान के आधिकारिक पाठ पर आधारित है। 🔗 lddashboard.legislative.gov.in
एक नज़र में सभी 12 अनुसूचियाँ
| क्रम | संबंधित अनुच्छेद | मुख्य विषय |
|---|---|---|
| पहली | अनुच्छेद 1 और 4 | राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नाम तथा उनके क्षेत्र |
| दूसरी | अनुच्छेद 59(3), 65(3), 75(6), 97, 125, 148(3), 158(3), 164(5), 186 और 221 | संवैधानिक पदाधिकारियों के वेतन, भत्ते और विशेषाधिकार संबंधी प्रावधान |
| तीसरी | अनुच्छेद 75(4), 99, 124(6), 148(2), 164(3), 188 और 219 | शपथ और प्रतिज्ञान के प्रारूप |
| चौथी | अनुच्छेद 4(1) और 80(2) | राज्यसभा में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए सीटों का आवंटन |
| पाँचवीं | अनुच्छेद 244(1) | अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों का प्रशासन तथा नियंत्रण |
| छठी | अनुच्छेद 244(2) और 275(1) | असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन |
| सातवीं | अनुच्छेद 246 | संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची |
| आठवीं | अनुच्छेद 344(1) और 351 | संविधान में मान्य 22 भाषाएँ |
| नौवीं | अनुच्छेद 31ख | कुछ अधिनियमों और विनियमों को सूचीबद्ध करने की व्यवस्था |
| दसवीं | अनुच्छेद 102(2) और 191(2) | दल-बदल के आधार पर अयोग्यता |
| ग्यारहवीं | अनुच्छेद 243छ | पंचायतों से संबंधित 29 विषय |
| बारहवीं | अनुच्छेद 243ब | नगरपालिकाओं से संबंधित 18 विषय |
पहली से चौथी अनुसूची: देश, पद और प्रतिनिधित्व
पहली अनुसूची: भारत का क्षेत्रीय नक्शा
पहली अनुसूची में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नाम तथा उनके क्षेत्र का वर्णन है। अनुच्छेद 1 भारत को राज्यों का संघ बताता है; अनुच्छेद 4 के अनुसार अनुच्छेद 2 और 3 के तहत बनाए गए कानून पहली और चौथी अनुसूची में आवश्यक बदलाव कर सकते हैं। इसलिए राज्य का नाम, सीमा या संघीय क्षेत्र बदलने से जुड़ा प्रश्न आए, तो पहली अनुसूची याद रखें। वर्तमान राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों की संख्या को इस अनुसूची का स्थायी विषय न मानें—यह संख्या समय के साथ बदल सकती है।
दूसरी अनुसूची: पदों से जुड़ी वित्तीय व्यवस्थाएँ
इस अनुसूची में राष्ट्रपति, राज्यपाल, संसद और राज्य विधानमंडलों के पीठासीन पदाधिकारियों, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों तथा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक जैसे पदों से जुड़े वेतन, भत्तों या अन्य शर्तों के प्रावधान हैं। परीक्षा के लिए इसका संकेत याद रखें: दूसरी अनुसूची = पद और पारिश्रमिक। किसी पद का वर्तमान वेतन समय के साथ बदल सकता है; अनुसूची का स्थायी महत्त्व संवैधानिक संदर्भ है।
तीसरी अनुसूची: शपथ और प्रतिज्ञान
तीसरी अनुसूची विभिन्न संवैधानिक पदों और सदस्यों के लिए शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप देती है। इनमें मंत्री, संसद या राज्य विधानमंडल के सदस्य, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक से संबंधित प्रारूप शामिल हैं। यह अनुसूची पद की शर्तें नहीं, बल्कि शपथ का पाठ बताती है—यही इसे दूसरी अनुसूची से अलग करता है।
चौथी अनुसूची: राज्यसभा में सीटें
चौथी अनुसूची राज्यसभा में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए सीटों के आवंटन का विवरण देती है। इसे सातवीं अनुसूची से न मिलाएँ: चौथी अनुसूची प्रतिनिधित्व और सीटों के आवंटन से जुड़ी है; सातवीं अनुसूची कानून बनाने के विषयों के बँटवारे से।
पाँचवीं से आठवीं अनुसूची: जनजातीय प्रशासन, विधायी शक्तियाँ और भाषाएँ
पाँचवीं अनुसूची: अनुसूचित क्षेत्र
अनुच्छेद 244(1) से जुड़ी पाँचवीं अनुसूची कुछ अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन तथा नियंत्रण की व्यवस्था करती है। इसमें जनजातीय सलाहकार परिषद और अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन से जुड़े प्रावधान हैं। याद रखने योग्य बात यह है कि पाँचवीं अनुसूची का विषय जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन है; यह पंचायतों के 29 विषयों वाली ग्यारहवीं अनुसूची नहीं है।
छठी अनुसूची: चार पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्र
छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के लिए स्वायत्त जिला परिषदों और जहाँ प्रावधान लागू हों, क्षेत्रीय परिषदों की व्यवस्था करती है। परिषदों के पास अनुसूची में निर्दिष्ट विषयों पर सीमित विधायी, प्रशासनिक और न्यायिक कार्य हो सकते हैं। इसका दायरा पाँचवीं अनुसूची से अलग है: छठी अनुसूची इन चार राज्यों के निर्दिष्ट जनजातीय क्षेत्रों पर लागू विशेष व्यवस्था है; पाँचवीं अनुसूची अन्य अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है।
सातवीं अनुसूची: विधायी विषयों का बँटवारा
सातवीं अनुसूची में तीन सूचियाँ हैं। संघ सूची के विषयों पर संसद कानून बनाती है; राज्य सूची के विषयों पर सामान्यतः राज्य विधानमंडल कानून बनाते हैं; समवर्ती सूची के विषयों पर संसद और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन टकराव की स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 254 के नियम लागू होते हैं। संघ सूची का रक्षा या मुद्रा जैसा विषय, राज्य सूची का पुलिस या लोक-व्यवस्था जैसा विषय और समवर्ती सूची का शिक्षा या विवाह जैसा विषय इसका उदाहरण समझने में मदद करता है। सूची का सही वर्गीकरण संविधान के पाठ से जाँचना चाहिए, क्योंकि कुछ मामलों में अपवाद और विशेष प्रावधान लागू हो सकते हैं।
आठवीं अनुसूची: भाषाएँ
आठवीं अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ हैं: असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली। मूल संविधान में 14 भाषाएँ थीं। सिंधी को 21वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1967 से जोड़ा गया; बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को 92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 से जोड़ा गया। आठवीं अनुसूची की भाषा होना और संघ की राजभाषा होना एक ही बात नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 343 संघ की राजभाषा से संबंधित है; आठवीं अनुसूची भाषा-संबंधी संवैधानिक प्रावधानों की सूची है।
नौवीं से बारहवीं अनुसूची: कानून, दल-बदल और स्थानीय शासन
नौवीं अनुसूची: अनुच्छेद 31ख और न्यायिक समीक्षा
पहली संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 से जोड़ी गई नौवीं अनुसूची में कुछ अधिनियमों और विनियमों को रखा गया। इसे अनुच्छेद 31ख के साथ पढ़ा जाता है। इसे यह कहकर याद करना गलत है कि इसमें शामिल हर कानून हमेशा न्यायिक समीक्षा से पूरी तरह बाहर है। उच्चतम न्यायालय के आई.आर. कोएल्हो निर्णय के अनुसार 24 अप्रैल 1973 के बाद नौवीं अनुसूची में डाले गए कानूनों की संवैधानिक समीक्षा हो सकती है, यदि वे संविधान की मूल संरचना को क्षति पहुँचाने के आधार पर चुनौती के दायरे में आएँ। 🔗 api.sci.gov.in
दसवीं अनुसूची: दल-बदल
52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 ने दसवीं अनुसूची जोड़ी। इसमें संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की दल-बदल के आधार पर अयोग्यता से संबंधित प्रावधान हैं। इसमें अयोग्यता के आधार और निर्णय की प्रक्रिया से जुड़े नियम हैं; पीठासीन अधिकारी की भूमिका भी इस व्यवस्था का हिस्सा है। संबंधित अनुच्छेद 102(2) और 191(2) हैं। इसकी मूल पहचान याद रखें: दसवीं = दल-बदल।
ग्यारहवीं अनुसूची: पंचायतों के 29 विषय
73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने अनुच्छेद 243छ के साथ ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी। इसमें पंचायतों को सौंपे जा सकने वाले 29 विषय हैं। इनमें कृषि, भूमि सुधार और लघु सिंचाई; पशुपालन, मत्स्यपालन और सामाजिक वानिकी; लघु, खाद्य और ग्रामीण उद्योग; ग्रामीण आवास और पेयजल; सड़कें और ग्रामीण विद्युतीकरण; गरीबी उन्मूलन; शिक्षा; स्वास्थ्य और स्वच्छता; महिला एवं बाल विकास; सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा सामुदायिक संपत्तियों का रखरखाव शामिल हैं। इन विषयों का अनुसूची में होना अपने-आप हर पंचायत को समान अधिकार नहीं देता; वास्तविक हस्तांतरण राज्य के कानूनों और व्यवस्था पर निर्भर करता है।
बारहवीं अनुसूची: नगरपालिकाओं के 18 विषय
74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने अनुच्छेद 243ब के साथ बारहवीं अनुसूची जोड़ी। इसमें नगरपालिकाओं को सौंपे जा सकने वाले 18 विषय हैं: नगर नियोजन; भूमि उपयोग और भवन निर्माण का विनियमन; आर्थिक-सामाजिक विकास की योजना; सड़कें और पुल; घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक जलापूर्ति; सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन; अग्निशमन सेवाएँ; शहरी वानिकी और पर्यावरण संरक्षण; कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा; मलिन बस्ती सुधार; शहरी गरीबी उन्मूलन; पार्क और उद्यान जैसी सुविधाएँ; सांस्कृतिक, शैक्षिक और सौंदर्यपरक पहलू; कब्रिस्तान और श्मशान; कांजी हाउस तथा पशु-क्रूरता की रोकथाम; जन्म-मृत्यु पंजीकरण; सड़क-बत्ती, पार्किंग, बस-स्टॉप और सार्वजनिक सुविधाएँ; तथा बूचड़खानों और चर्मशोधनशालाओं का विनियमन। इसे पंचायतों की ग्यारहवीं अनुसूची से अलग पहचानें: ग्यारहवीं ग्रामीण पंचायत, बारहवीं शहरी नगरपालिका।
याद रखने की ट्रिक
पहली चार को क्रम में एक कहानी की तरह पढ़ें: देश का नक्शा, पद का वेतन, शपथ का पाठ, राज्यसभा की सीट। अगली चार: जनजातीय क्षेत्र, पूर्वोत्तर की स्वायत्त परिषदें, तीन विधायी सूचियाँ, भाषाएँ। आखिरी चार: कुछ कानून, दल-बदल, पंचायत के 29, नगरपालिका के 18। क्रमांक की झटपट जाँच के लिए यह सूत्र उपयोगी है: 1 क्षेत्र, 2 वेतन, 3 शपथ, 4 सीट, 5-6 जनजातीय प्रशासन, 7 शक्तियाँ, 8 भाषा, 9 कानून, 10 दल-बदल, 11 पंचायत, 12 नगरपालिका।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है
प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न प्रायः मिलान, सही अनुच्छेद, संशोधन-वर्ष, संख्या-आधारित तथ्य और कथन-आधारित विकल्पों के रूप में आते हैं। सबसे आम मिलान हैं: अनुच्छेद 246—सातवीं; 31ख—नौवीं; 102(2)—दसवीं; 243छ—ग्यारहवीं; 243ब—बारहवीं। संख्या वाले प्रश्नों में आठवीं अनुसूची की 22 भाषाएँ, ग्यारहवीं के 29 और बारहवीं के 18 विषय विशेष रूप से पूछे जाते हैं।
कथन-आधारित प्रश्नों में यह जाँचा जा सकता है कि आठवीं अनुसूची में शामिल होना किसी भाषा को संघ की राजभाषा बना देता है या नहीं—उत्तर नहीं है। इसी तरह नौवीं अनुसूची को पूर्ण न्यायिक प्रतिरक्षा बताना भी सही नहीं। पाँचवीं और छठी अनुसूची में अंतर, तथा चौथी और सातवीं के विषयों का अंतर, अक्सर विकल्पों में छिपा होता है। संशोधन याद रखें: पहली—1951; दसवीं—1985; ग्यारहवीं और बारहवीं—1992; सिंधी—1967; चार भाषाएँ—92वाँ संशोधन, 2003।
हालिया बदलाव
उपलब्ध आधिकारिक समेकित संविधान संस्करण 2024 तक अनुसूचियों की मूल संख्या 12 ही है। हाल के प्रमुख संशोधनों में 106वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 शामिल है, लेकिन उसने अनुसूचियों की संख्या नहीं बढ़ाई और न ही आठवीं अनुसूची की भाषा-सूची बदली। इसलिए इस विषय में परीक्षा की तैयारी के लिए स्थायी रूप से याद रखने योग्य संख्या 12 अनुसूचियाँ और 22 भाषाएँ है। पदाधिकारियों के वेतन या राज्यों-क्षेत्रों के विवरण जैसे बदल सकने वाले तथ्यों को अलग से नवीनतम आधिकारिक पाठ से जाँचें। 🔗 lddashboard.legislative.gov.in
त्वरित पुनरावृत्ति
अनुसूचियाँ संविधान के विषयों को व्यवस्थित और स्पष्ट करती हैं। पहली से चौथी देश के क्षेत्र, संवैधानिक पदों और प्रतिनिधित्व से जुड़ी हैं; पाँचवीं और छठी जनजातीय प्रशासन से; सातवीं शक्तियों के बँटवारे से; आठवीं भाषाओं से; नौवीं और दसवीं कानूनों तथा दल-बदल से; और अंतिम दो स्थानीय स्वशासन से। यदि अनुच्छेद, मुख्य विषय और एक प्रमुख तथ्य साथ याद हों, तो अधिकांश वस्तुनिष्ठ प्रश्न आसानी से हल किए जा सकते हैं।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| कुल अनुसूचियाँ | 12 |
|---|---|
| आठवीं अनुसूची की भाषाएँ | 22 |
| ग्यारहवीं अनुसूची | पंचायतों के 29 विषय |
| बारहवीं अनुसूची | नगरपालिकाओं के 18 विषय |
| दसवीं अनुसूची | दल-बदल के आधार पर अयोग्यता |
| सातवीं अनुसूची | संघ, राज्य और समवर्ती सूची |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
👆 सही विकल्प पर क्लिक करें — तुरंत पता चलेगा सही है या गलत।
Q1 राज्यसभा में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए सीटों का आवंटन किस अनुसूची में है?
Q2 दल-बदल के आधार पर अयोग्यता किस अनुसूची का विषय है?
Q3 भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाएँ सूचीबद्ध हैं?
Q4 ग्यारहवीं अनुसूची मुख्यतः किससे संबंधित है?
Q5 अनुच्छेद 246 के साथ कौन-सी अनुसूची जुड़ी है?








