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भारत के प्रमुख संविधान संशोधन: अनुच्छेद 368 से 106वें संशोधन तक संपूर्ण गाइड

भारतीय संविधान के ऐतिहासिक और नवीनतम 106वें संशोधन तक की पूरी सूची, अनुच्छेद 368 की प्रक्रिया, परीक्षा-उपयोगी ट्रिक्स और पिछले वर्षों के प्रश्नों का संपूर्ण विश्लेषण।

⭐ मुख्य बिंदु

  • भारतीय संविधान के भाग XX के अनुच्छेद 368 में दक्षिण अफ्रीका से प्रेरित संविधान संशोधन की प्रक्रिया वर्णित है।
  • केशवानंद भारती वाद (1973) के अनुसार संसद मूल अधिकारों सहित संशोधन कर सकती है, परंतु मूल ढाँचे को नहीं बदल सकती।
  • 42वें संशोधन (1976) को 'लघु संविधान' कहा जाता है, जिसके तहत प्रस्तावना में तीन नए शब्द और भाग IVA में मौलिक कर्तव्य जोड़े गए।
  • 44वें संशोधन (1978) ने संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत कानूनी अधिकार बना दिया।
  • 52वें संशोधन (1985) द्वारा 10वीं अनुसूची जोड़कर दल-बदल विरोधी कानून को लागू किया गया।
  • 61वें संशोधन (1989) ने मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी।
  • 73वें और 74वें संशोधन (1992) ने क्रमशः पंचायती राज (11वीं अनुसूची) और नगरपालिकाओं (12वीं अनुसूची) को संवैधानिक दर्जा दिया।
  • 106वां संशोधन (2023) 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण प्रदान करता है।

संविधान संशोधन: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं संवैधानिक प्रावधान

भारतीय संविधान न तो ब्रिटिश संविधान की तरह अत्यधिक लचीला है और न ही अमेरिकी संविधान की तरह अत्यधिक कठोर। डॉ. भीमराव आंबेडकर के शब्दों में, संविधान सभा ने देश के सर्वोच्च कानून को एक जीवंत दस्तावेज (Living Document) का स्वरूप दिया, जो बदलती सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढाल सके।

भारतीय संविधान के भाग XX (भाग 20) के अनुच्छेद 368 में संसद को संविधान तथा उसकी व्यवस्थाओं में संशोधन करने की शक्तियाँ और प्रक्रियाएँ प्रदान की गई हैं। यह प्रावधान दक्षिण अफ्रीका के संविधान से प्रेरित होकर भारतीय संविधान में शामिल किया गया था।

केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973): इस ऐतिहासिक वाद में सर्वोच्च न्यायालय की 13 जजों की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है, लेकिन वह संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती।

संविधान संशोधन की प्रक्रिया एवं प्रकार

संसद द्वारा संविधान में तीन अलग-अलग प्रक्रियाओं के माध्यम से संशोधन किया जाता है, जिनमें से दो प्रक्रियाएँ अनुच्छेद 368 के अंतर्गत आती हैं:

1. साधारण बहुमत द्वारा संशोधन (अनुच्छेद 368 के दायरे से बाहर)

संविधान के कई उपबंध संसद के दोनों सदनों में उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत (50% से अधिक) से संशोधित किए जा सकते हैं। तकनीकी रूप से इन्हें अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं माना जाता।

  • नए राज्यों का प्रवेश या गठन तथा वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन (अनुच्छेद 2, 3 और 4)।
  • राज्यों में विधान परिषद का सृजन या उत्सादन (अनुच्छेद 169)।
  • नागरिकता की प्राप्ति एवं समाप्ति।
  • राजभाषा का प्रयोग तथा संसद व राज्य विधानमंडलों के विशेषाधिकार।

2. संसद का विशेष बहुमत (अनुच्छेद 368 के अंतर्गत)

अधिकांश महत्वपूर्ण संशोधनों के लिए संसद के प्रत्येक सदन में निम्नलिखित दोनों शर्तों का पूरा होना अनिवार्य है:

  • सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत (50% से अधिक)।
  • उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई (2/3) बहुमत।

उदाहरण: मूल अधिकार (Fundamental Rights), राज्य के नीति-निदेशक तत्व (DPSP) तथा वे सभी उपबंध जो प्रथम एवं तृतीय श्रेणी में शामिल नहीं हैं।

3. विशेष बहुमत एवं आधे राज्यों का अनुसमर्थन

जब संशोधन का प्रभाव भारत के संघीय ढाँचे (Federal Structure) पर पड़ता है, तब संसद के दोनों सदनों के विशेष बहुमत के अतिरिक्त कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से इसकी पुष्टि (Ratification) आवश्यक होती है।

  • राष्ट्रपति का निर्वाचन एवं उसकी प्रक्रिया (अनुच्छेद 54 एवं 55)।
  • केंद्र और राज्यों की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार।
  • उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों से संबंधित उपबंध।
  • सातवीं अनुसूची की कोई भी सूची (संघ, राज्य या समवर्ती सूची)।
  • संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व।
  • स्वयं अनुच्छेद 368 के उपबंध।

परीक्षा के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण संविधान संशोधनों की संपूर्ण सूची

प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, State PSC, SSC, Banking, Railways) में बार-बार पूछे जाने वाले प्रमुख ऐतिहासिक एवं आधुनिक संशोधनों का व्यवस्थित विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

संशोधन अधिनियम एवं वर्षसंशोधित अनुच्छेद / अनुसूचीमुख्य प्रावधान एवं प्रभाव
पहला संशोधन, 1951अनुच्छेद 15, 19, 31A, 31B; 9वीं अनुसूचीभूमि सुधार और ज़मींदारी उन्मूलन कानूनों को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) से बचाने हेतु 9वीं अनुसूची जोड़ी गई। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध जोड़े गए।
7वां संशोधन, 1956भाग VII समाप्त, अनुच्छेद 131, 153, 230 आदिराज्य पुनर्गठन आयोग (फ़ज़ल अली आयोग) की सिफारिशों के आधार पर 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बने। दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही साझा उच्च न्यायालय का प्रावधान हुआ।
24वां संशोधन, 1971अनुच्छेद 13 और 368गोलकनाथ वाद के प्रभाव को समाप्त करते हुए संसद को मौलिक अधिकारों सहित किसी भी भाग को संशोधित करने की स्पष्ट शक्ति मिली। राष्ट्रपति के लिए संशोधन विधेयक पर अनुमति देना अनिवार्य किया गया।
42वां संशोधन, 1976
(लघु संविधान / Mini Constitution)
प्रस्तावना, 51A (भाग IVA), 39A, 43A, 48Aप्रस्तावना में 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए। स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए। शिक्षा, वन, वन्यजीव संरक्षण, नाप-तौल व न्याय प्रशासन को राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित किया गया।
44वां संशोधन, 1978अनुच्छेद 300A, 352, 359 आदिसंपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत कानूनी अधिकार बनाया गया। राष्ट्रीय आपातकाल के लिए 'आंतरिक अशांति' शब्द की जगह 'सशस्त्र विद्रोह' जोड़ा गया। आपातकाल में भी अनुच्छेद 20 और 21 निलंबित नहीं हो सकते।
52वां संशोधन, 1985अनुच्छेद 101, 102, 190, 191; 10वीं अनुसूचीदल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) पारित किया गया और संविधान में 10वीं अनुसूची जोड़ी गई।
61वां संशोधन, 1989अनुच्छेद 326लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों में मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई।
69वां संशोधन, 1991अनुच्छेद 239AA एवं 239ABकेंद्र शासित प्रदेश दिल्ली को विशेष दर्जा देते हुए 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली' (NCT of Delhi) नाम दिया गया तथा 70 सदस्यीय विधानसभा का गठन हुआ।
73वां संशोधन, 1992भाग IX, अनुच्छेद 243 से 243O; 11वीं अनुसूचीपंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक मान्यता दी गई। 11वीं अनुसूची में पंचायतों के लिए 29 कार्य विषय सौंपे गए।
74वां संशोधन, 1992भाग IXA, अनुच्छेद 243P से 243ZG; 12वीं अनुसूचीशहरी स्थानीय निकायों (नगरपालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा दिया गया। 12वीं अनुसूची में नगरपालिकाओं हेतु 18 कार्य विषय शामिल किए गए।
86वां संशोधन, 2002अनुच्छेद 21A, 45, 51A(k)प्रारंभिक शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया (अनुच्छेद 21A)। 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना माता-पिता का 11वां मौलिक कर्तव्य बनाया गया।
91वां संशोधन, 2003अनुच्छेद 75(1A), 164(1A)केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्य मंत्रिपरिषद का आकार क्रमशः लोकसभा/विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के अधिकतम 15% तक सीमित किया गया (राज्यों में न्यूनतम 12 मंत्री)। दल-बदल में 1/3 सदस्यों के विभाजन की छूट समाप्त की गई।
99वां संशोधन, 2014अनुच्छेद 124A, 124B, 124Cराष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) का गठन, जिसे अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया (कॉलेजियम प्रणाली पुनः बहाल)।
100वां संशोधन, 2015पहली अनुसूचीभारत और बांग्लादेश के बीच 1974 के भू-सीमा समझौते (Land Boundary Agreement) के तहत अंतःक्षेत्रों (enclaves) का आदान-प्रदान किया गया।
101वां संशोधन, 2016अनुच्छेद 246A, 269A, 279Aवस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया। राज्यों और केंद्र को वस्तु एवं सेवा पर एक साथ कर लगाने की शक्ति तथा GST परिषद का गठन।
102वां संशोधन, 2018अनुच्छेद 338B, 342Aराष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।
103वां संशोधन, 2019अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6)सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण का प्रावधान।
104वां संशोधन, 2020अनुच्छेद 334लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों (SC) और जनजातियों (ST) के लिए सीटों का आरक्षण 10 वर्ष (2030 तक) के लिए बढ़ाया गया। एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए मनोनीत सीटों की व्यवस्था समाप्त की गई।
105वां संशोधन, 2021अनुच्छेद 342A, 366(26C)राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC/OBC) की अपनी राज्य सूची तैयार करने की शक्ति पुनः बहाल की गई।
106वां संशोधन, 2023अनुच्छेद 239AA, 330A, 332A, 334A'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित की गईं।

नवीनतम संशोधन: 106वां संविधान संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम)

संसद के विशेष सत्र में पारित 106वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 (विधेयक संख्या: 128वां संविधान संशोधन विधेयक) भारतीय लोकतंत्र में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

  • सीटों का आरक्षण: इसके द्वारा लोकसभा (अनुच्छेद 330A), राज्य विधानसभाओं (अनुच्छेद 332A), और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की गई हैं।
  • उप-आरक्षण: SC और ST वर्ग के लिए पहले से आरक्षित कुल सीटों में से भी एक-तिहाई सीटें उसी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
  • लागू होने की शर्त (अनुच्छेद 334A): यह आरक्षण कानून बनने के तुरंत बाद होने वाली अगली जनगणना के प्रकाशन और उसके पश्चात होने वाले परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद प्रभावी होगा।
  • अवधि: यह आरक्षण प्रभावी होने की तिथि से 15 वर्षों की अवधि तक लागू रहेगा, जिसे संसद विधि बनाकर आगे बढ़ा सकती है।

स्मार्ट ट्रिक्स: प्रमुख संशोधनों को याद रखने के सूत्र

  1. लघु संविधान बनाम सुधार (42वां vs 44वां): 4 + 2 = 6 (1976), जिसमें आपातकाल के दौरान व्यापक बदलाव किए गए। 4 + 4 = 8 (1978), जिसमें जनता पार्टी सरकार ने 42वें संशोधन की ज्यादतियों को 'सुधारा'। संपत्ति का अधिकार 44वें द्वारा मौलिक अधिकार से हटा।
  2. स्थानीय स्वशासन (73वां एवं 74वां - 1992): 73 = गाँव (पंचायत, 11वीं अनुसूची, 29 विषय)। 74 = शहर (नगरपालिका, 12वीं अनुसूची, 18 विषय)। याद रखें: 2 + 9 = 11 (11वीं अनुसूची) और 1 + 8 = 9 (भाग IXA से जुड़ाव)।
  3. युवा और मतदान (61वां - 1989): 61 वर्ष का व्यक्ति 18 वर्ष के युवा को वोट डालते देख रहा है — यानी 21 से घटाकर 18 वर्ष आयु।
  4. शिक्षा का अधिकार (86वां - 2002): 8 और 6 का अंतर 2 होता है — अनुच्छेद 21A (2 और 1) जोड़ा गया, जो 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा सुनिश्चित करता है।
  5. सेंचुरी सीरीज (101 से 106):
    • 101 = एक देश, एक टैक्स (GST)
    • 102 = पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को संवैधानिक दर्जा
    • 103 = 10% EWS आरक्षण (3 अक्षर: E-W-S)
    • 104 = SC/ST आरक्षण 10 साल बढ़ा, एंग्लो-इंडियन सीट समाप्त (4 = 4 समुदाय में 2 बचे, 2 घटे)
    • 105 = राज्यों की OBC सूची बनाने की शक्ति बहाल
    • 106 = नारी शक्ति वंदन (महिलाओं को 33% आरक्षण)

प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्न-पैटर्न (PYQ Trends)

विगत 10 वर्षों के UPSC, BPSC, UPPSC और SSC के प्रश्न पत्रों का विश्लेषण करने पर निम्नलिखित तीन मुख्य पैटर्न सामने आते हैं:

  • सुमेलित करने वाले प्रश्न (Match the Following): एक तरफ संशोधन अधिनियम (जैसे 52वां, 61वां, 69वां, 86वां) और दूसरी तरफ उनका विषय (दल-बदल, मतदान आयु, दिल्ली का दर्जा, शिक्षा का अधिकार) दिया जाता है।
  • अनुच्छेद और संशोधन का संबंध: 101वें संशोधन से कौन सा नया अनुच्छेद जुड़ा (अनुच्छेद 279A - GST काउंसिल), या EWS आरक्षण किस अनुच्छेद में संशोधन से आया (अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6))।
  • प्रक्रिया-आधारित वैचारिक प्रश्न: UPSC एवं राज्य लोक सेवा आयोगों में अक्सर यह पूछा जाता है कि किस संशोधन में राज्यों की सहमति आवश्यक है और किसमें नहीं। याद रखें कि न्यायपालिका, सातवीं अनुसूची, राष्ट्रपति चुनाव और स्वयं अनुच्छेद 368 में बदलाव हेतु आधे राज्यों की विधानसभाओं का अनुसमर्थन अनिवार्य है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

संवैधानिक भाग एवं अनुच्छेदभाग XX, अनुच्छेद 368
स्रोतः किस देश से लिया गयादक्षिण अफ्रीका का संविधान
कुल संविधान संशोधन अधिनियम106 (नवीनतम: नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023)
पहला संविधान संशोधन1951 (9वीं अनुसूची जोड़ी गई)
लघु संविधान (Mini Constitution)42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976
रद्द किया गया संशोधन99वां संशोधन (NJAC - 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 भारतीय संविधान के किस संशोधन द्वारा मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई थी?

Q2 संविधान के किस संशोधन अधिनियम को 'लघु संविधान' (Mini Constitution) की संज्ञा दी जाती है?

Q3 आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 10% आरक्षण की व्यवस्था किस संविधान संशोधन द्वारा की गई?

Q4 यदि संसद को राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया में संशोधन करना हो, तो किस प्रकार के बहुमत की आवश्यकता होगी?

Q5 106वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) किससे संबंधित है?

स्रोत