निजी संपत्ति पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जेलों में जातिगत भेदभाव पर रोक व एनर्जी हब में भारत
सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 39(b) और जेलों में जातिगत श्रम विभाजन पर ऐतिहासिक व्यवस्था दी, वहीं कैबिनेट ने ऊर्जा दक्षता हब में भारत के प्रवेश को मंजूरी दी।
⭐ मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की पीठ ने फैसला दिया कि अनुच्छेद 39(b) के तहत सभी निजी संपत्तियां समुदाय के भौतिक संसाधन नहीं हैं।
- शीर्ष अदालत ने 1977 के रंगनाथ रेड्डी मामले में दी गई विस्तृत समाजवादी व्याख्या को दरकिनार किया।
- सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 31C के विधिक अस्तित्व और संरक्षण की वैधता को बरकरार रखा।
- सुकन्या शांता बनाम भारत संघ मामले में जेलों के भीतर जातिगत श्रम विभाजन और बैरक अलगाव को असंवैधानिक घोषित किया गया।
- जेलों में भोजन पकाने और सफाई कार्यों में जातिगत वरीयता को अनुच्छेद 14, 15, 17, 21 और 23 का उल्लंघन माना गया।
- केंद्रीय कैबिनेट ने भारत के ‘अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा दक्षता हब’ में शामिल होने के आशय पत्र पर मुहर लगाई।
- ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) को भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा दक्षता हब का कार्यान्वयन निकाय नामित किया गया।
- यह सदस्यता भारत के 2070 तक नेट-ज़ीरो और 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्यों को गति देगी।
भारत की संवैधानिक न्यायशास्त्र और राष्ट्रीय नीति निर्माण के क्षेत्र में हाल ही में कई अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट की नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने निजी संपत्ति और राज्य के अधिकारों को लेकर दशकों पुराने विधिक विवाद का निपटारा किया। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने भारतीय जेलों में जातिगत भेदभाव और अमानवीय श्रम विभाजन को असंवैधानिक घोषित करते हुए ऐतिहासिक सुधार की नींव रखी। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सतत विकास और निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाते हुए ‘अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा दक्षता हब’ में भारत के शामिल होने को औपचारिक मंजूरी दी है।
1. निजी संपत्ति और अनुच्छेद 39(b): सुप्रीम कोर्ट की 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ का ऐतिहासिक फ़ैसला
क्या हुआ?
भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 8:1 के बहुमत से यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि नागरिकों की प्रत्येक निजी संपत्ति को संविधान के अनुच्छेद 39(b) के तहत ‘समुदाय का भौतिक संसाधन’ (Material Resources of the Community) नहीं माना जा सकता। इसका सीधा अर्थ यह है कि राज्य सामान्य जनहित के नाम पर मनमाने ढंग से सभी निजी संपत्तियों का अधिग्रहण और पुनर्वितरण नहीं कर सकता। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ निजी संपत्तियां जो व्यापक जनहित, पर्यावरण या सामुदायिक भलाई के लिए अपरिहार्य हों, वे परिस्थिति विशेष में इसके दायरे में आ सकती हैं। पीठ ने यह भी दोहराया कि अनुच्छेद 31C का संरक्षण (केशवानंद भारती मामले में निर्धारित सीमा तक) आज भी प्रभावी है।
पृष्ठभूमि
यह मामला 1986 के महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास अधिनियम (MHADA) में किए गए संशोधनों से शुरू हुआ था, जिसके तहत मुंबई में जीर्ण-शीर्ण इमारतों (Cessed Properties) के अधिग्रहण का अधिकार दिया गया था। वर्ष 1977 में ‘कर्नाटक राज्य बनाम रंगनाथ रेड्डी’ मामले में न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्णा अय्यर ने एक अल्पमत राय में कहा था कि सभी निजी संपत्तियां भी अनुच्छेद 39(b) के तहत समुदाय के भौतिक संसाधन हैं। बाद में 1982 के ‘संजीव कोक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी’ मामले में इस समाजवादी व्याख्या को पांच जजों की पीठ ने स्वीकार कर लिया था। अब 9 जजों की वृहद पीठ ने उस पुरानी कठोर समाजवादी व्याख्या को खारिज करते हुए वर्तमान मिश्रित अर्थव्यवस्था के अनुकूल संतुलन स्थापित किया है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- संविधान का भाग IV: अनुच्छेद 39(b) राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों (DPSP) का हिस्सा है, जो निर्देश देता है कि समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार बंटे जिससे सर्वोत्तम सामूहिक हित सध सके।
- अनुच्छेद 31C: इसे 25वें संविधान संशोधन अधिनियम (1971) द्वारा जोड़ा गया था, ताकि अनुच्छेद 39(b) और (c) को लागू करने वाले कानूनों को अनुच्छेद 14 और 19 के उल्लंघन के आधार पर अमान्य न ठहराया जा सके।
- आर्थिक सुधार और संविधान: न्यायालय ने रेखांकित किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था 1991 के बाद राज्य-नियंत्रित मॉडल से हटकर सार्वजनिक-निजी सह-अस्तित्व की ओर बढ़ चुकी है, जहां निजी पूंजी और उद्यम को भी संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है।
2. जेलों में जातिगत भेदभाव पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा प्रहार: जेल नियमावलियों के नियम असंवैधानिक
क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ (‘सुकन्या शांता बनाम भारत संघ’ वाद) ने देश के विभिन्न राज्यों की जेल नियमावलियों (Prison Manuals) में जाति आधारित कार्यों के आवंटन और बैरकों के अलगाव को असंवैधानिक घोषित कर दिया। अदालत ने कहा कि जेलों के भीतर उच्च जातियों को खाना पकाने का कार्य सौंपना और हाशिए की जातियों को मैला ढोने, सीवर सफाई या झाड़ू लगाने जैसे काम देना अस्पृश्यता और भेदभाव को संस्थागत रूप देता है। न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर अपनी जेल नियमावलियों से जाति-सूचक प्रावधान हटाने और कैदियों के रजिस्टरों से ‘जाति’ का कॉलम समाप्त करने का आदेश दिया।
पृष्ठभूमि
पत्रकार सुकन्या शांता द्वारा भारतीय जेलों में जातिगत अलगाव पर प्रकाशित खोजी रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों की दशकों पुरानी जेल संहिताओं में जातिगत पदानुक्रम को मान्यता दी गई थी, जैसे पश्चिम बंगाल जेल कोड में यह व्यवस्था थी कि यदि कोई कैदी इतनी उच्च जाति का हो कि वह दूसरों का बनाया भोजन न खा सके, तो उसे रसोइया बनाया जाएगा।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन: न्यायालय ने इसे अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 15 (जातिगत भेदभाव का निषेध), 17 (अस्पृश्यता का अंत), 21 (गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार) और 23 (बलात श्रम और बेगार का निषेध) का स्पष्ट उल्लंघन माना।
- विमुक्त जनजातियों (DNT) का संरक्षण: अदालत ने ब्रिटिश कालीन औपनिवेशिक मानसिकता पर प्रहार करते हुए जेल नियमों में विमुक्त जनजातियों को स्वाभाविक ‘अभ्यस्त अपराधी’ (Habitual Offenders) मानने की प्रथा पर सख्त रोक लगाई।
- मॉडल कानून में बदलाव: केंद्र सरकार को केंद्रीय ‘मॉडल जेल मैनुअल 2016’ और ‘मॉडल कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं अधिनियम 2023’ में संशोधन करने के निर्देश दिए गए।
3. भारत ‘अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा दक्षता हब’ (Energy Efficiency Hub) में शामिल: केंद्रीय कैबिनेट का निर्णय
क्या हुआ?
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा दक्षता हब’ (Energy Efficiency Hub) में शामिल होने के लिए आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दी है। इसके साथ ही भारत वैश्विक स्तर पर ऊर्जा दक्षता और डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देने वाले इस अग्रणी मंच का सदस्य बन गया है। भारत की ओर से विद्युत मंत्रालय के अधीन कार्यरत वैधानिक निकाय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency - BEE) को इसकी कार्यान्वयन एजेंसी नामित किया गया है।
पृष्ठभूमि
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा दक्षता हब की स्थापना वर्ष 2020 में ‘इंटरनेशनल पार्टनरशिप फॉर एनर्जी एफिशिएंसी कोऑपरेशन’ (IPEEC) के उत्तराधिकारी मंच के रूप में की गई थी। इसका सचिवालय पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) में संचालित होता है। इस मंच में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, चीन, जापान, ब्राजील, सऊदी अरब और यूरोपीय आयोग सहित कुल 16 प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। भारत इसका सदस्य बनकर वैश्विक स्तर पर सर्वोत्तम तकनीकी प्रथाओं और नवाचारों को साझा कर सकेगा।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE): इसकी स्थापना 1 मार्च 2002 को ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के प्रावधानों के तहत की गई थी। यह भारत में ऊर्जा तीव्रता को कम करने वाली नोडल संस्था है।
- जलवायु लक्ष्य: यह निर्णय भारत के वर्ष 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ (शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन) हासिल करने और 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता विकसित करने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को मजबूती प्रदान करेगा।
- वैश्विक प्रतिबद्धता: भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में 2030 तक अपनी जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी लाने का संकल्प लिया है, जिसमें ऊर्जा दक्षता की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| अनुच्छेद 39(b) पीठ का फैसला | 8:1 बहुमत (अध्यक्षता: मुख्य न्यायाधीश) |
|---|---|
| अनुच्छेद 31C संविधान में शामिल | 25वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 |
| जेल जातिगत भेदभाव वाद | सुकन्या शांता बनाम भारत संघ (2024) |
| ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) स्थापना | 1 मार्च 2002 (ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001) |
| एनर्जी एफिशिएंसी हब की स्थापना | वर्ष 2020 (IPEEC का उत्तराधिकारी) |
| भारत का शुद्ध-शून्य (Net Zero) लक्ष्य | वर्ष 2070 |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 संविधान के अनुच्छेद 39(b) के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट की 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के हालिया निर्णय के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Q2 भारतीय संविधान का अनुच्छेद 31C किस संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से अंतःस्थापित किया गया था?
Q3 जेलों में जातिगत श्रम विभाजन और बैरक अलगाव को असंवैधानिक घोषित करने वाला ऐतिहासिक वाद कौन सा है?
Q4 ‘अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा दक्षता हब’ (Energy Efficiency Hub) में भारत की ओर से कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में किसे नामित किया गया है?
Q5 ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency - BEE) की स्थापना किस कानून के तहत की गई थी?







