विज्ञान एवं तकनीक

आदित्य-L1 ने बनाई सौर कोरोना की डॉपलर छवियां, गगनयान का सेपरेशन टेस्ट सफल

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान में दोहरी सफलता: आदित्य-L1 के VELC ने सौर तूफानों के अध्ययन हेतु डॉपलर वेग छवियां बनाईं, वहीं गगनयान का CM-SM पृथक्करण परीक्षण पूरा हुआ।

⭐ मुख्य बिंदु

  • आदित्य-L1 के VELC पेलोड ने सूर्य के कोरोना की पहली डॉपलर वेग छवियां सफलतापूर्वक तैयार की हैं।
  • यह डेटा प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया है।
  • डॉपलर इमेजिंग तकनीक पृथ्वी की ओर आने वाले कोरोनल मास इजेक्शन (CME) की सटीक निगरानी संभव बनाएगी।
  • इसरो ने तिरुवनंतपुरम स्थित VSSC में गगनयान के क्रू मॉड्यूल-सर्विस मॉड्यूल सेपरेशन टेस्ट पूरे किए।
  • यह परीक्षण वायुमंडलीय री-एंट्री से पहले मॉड्यूल के सुरक्षित अलगाव और शॉक-सहनशीलता को प्रमाणित करता है।
  • यह सफलता 2026 में निर्धारित गगनयान के पहले मानवरहित मिशन (G1) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत भारत में 68 पेटाफ्लॉप्स कुल क्षमता वाले 40 सुपरकंप्यूटर स्थापित हो चुके हैं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों ने अंतरिक्ष विज्ञान व मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में दो बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-L1 के प्रमुख पेलोड ने सूर्य के सबसे बाहरी वातावरण (कोरोना) की पहली ‘डॉपलर वेग छवियां’ तैयार करने में सफलता पाई है। वहीं दूसरी ओर, मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान के आगामी मानवरहित ‘G1 मिशन’ से पहले क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के पृथक्करण (Separation Tests) की कठिन परीक्षण शृंखला सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है।

1. आदित्य-L1 के VELC पेलोड द्वारा सौर कोरोना की डॉपलर वेग छवियां

क्या हुआ?

बेंगलुरु स्थित भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (Indian Institute of Astrophysics - IIA) के वैज्ञानिकों ने आदित्य-L1 पर स्थापित विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (VELC) से प्राप्त डेटा का विश्लेषण कर सौर कोरोना की अभूतपूर्व डॉपलर वेग (Doppler Velocity) छवियां निर्मित की हैं। इस डेटा प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर को डॉ. वी. मुथुप्रियाल और उनकी टीम ने विकसित किया है, जिसके निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय सहकर्मी-समीक्षित पत्रिका ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित हुए हैं।

तकनीकी पहलू और वैज्ञानिक महत्व

  • डॉपलर प्रभाव का अनुप्रयोग: प्रकाश के डॉपलर शिफ्ट के आधार पर प्लाज्मा की दृष्टि-रेखा (Line-of-sight) गति मापी जाती है। धनात्मक वेग (Positive Velocity) प्लाज्मा का प्रेक्षक से दूर जाना दर्शाता है, जबकि ऋणात्मक वेग (Negative Velocity) प्लाज्मा का पृथ्वी/प्रेक्षक की ओर बढ़ना इंगित करता है।
  • Fe XIV 5303 Å हरित रेखा: वैज्ञानिकों ने अत्यधिक आयनित लोहे (Fe XIV) की 5303 एंग्स्ट्रॉम वाली हरी वर्णक्रमीय रेखा का उपयोग करके कोरोना में प्लाज्मा प्रवाह की गतिशीलता को रिकॉर्ड किया।
  • कोरोनल मास इजेक्शन (CME) की निगरानी: यह तकनीक सूर्य से निकलने वाले विनाशकारी सौर तूफानों और कोरोनल मास इजेक्शन की दिशा और गति को सटीक रूप से ट्रैक करने में मदद करेगी। इससे पृथ्वी के निकट उपग्रह संचार, नेविगेशन प्रणालियों और पावर ग्रिड्स को सौर तूफानों के दुष्प्रभावों से पहले ही सुरक्षित किया जा सकेगा।

पृष्ठभूमि: आदित्य-L1 मिशन

आदित्य-L1 को 2 सितंबर 2023 को PSLV-C57 रॉकेट के माध्यम से श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था। 6 जनवरी 2024 को इसे पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन बिंदु 1 (L1) के चारों ओर एक ‘हेलो कक्षा’ (Halo Orbit) में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया था। इस स्थिति से उपग्रह बिना किसी ग्रहण या बाधा के सूर्य का निरंतर 24x7 प्रेक्षण कर सकता है। इसमें कुल 7 वैज्ञानिक पेलोड हैं, जिनमें VELC प्राथमिक रिमोट-सेंसिंग उपकरण है।

2. गगनयान मिशन: क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल पृथक्करण परीक्षण संपन्न

क्या हुआ?

इसरो ने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC), तिरुवनंतपुरम में गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के तहत क्रू मॉड्यूल (CM) और सर्विस मॉड्यूल (SM) के पृथक्करण परीक्षणों (Separation Tests) की शृंखला को सफलतापूर्वक पूरा किया।

परीक्षण का उद्देश्य और कार्यप्रणाली

गगनयान का ऑर्बिटल मॉड्यूल दो मुख्य भागों से मिलकर बना है—क्रू मॉड्यूल (जिसमें अंतरिक्ष यात्री रहेंगे) और सर्विस मॉड्यूल (जो प्रणोदन, ऊर्जा और सहायक प्रणालियां प्रदान करता है)।

  • लॉन्च से लेकर कक्षा में संचालन तक दोनों मॉड्यूल एक संयुक्त इकाई के रूप में कार्य करते हैं और ‘अंबिलिकल कनेक्शंस’ (विद्युत व तरल पदार्थ वाहक तार) के माध्यम से जुड़े रहते हैं।
  • पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश (Re-entry) से ठीक पहले क्रू मॉड्यूल को सर्विस मॉड्यूल से अलग होना अनिवार्य होता है। इस पृथक्करण में सटीक पायरोटेक्निक उपकरणों (धमाका-आधारित बोल्ट) का उपयोग किया जाता है।
  • VSSC में किए गए परीक्षणों ने यह प्रमाणित किया कि अलगाव के दौरान उत्पन्न होने वाले उच्च यांत्रिक झटकों (Mechanical Shocks) को क्रू मॉड्यूल के एवियोनिक्स, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और हीट शील्ड्स (Aft & Conical Thermal Protection Systems) बिना किसी नुकसान के सहन कर सकते हैं।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

मिशन/घटकविवरण / प्रमुख आंकड़े
गगनयान का लक्ष्य3 सदस्यीय दल को 400 किमी की निचली पृथ्वी कक्षा (LEO) में 3 दिन भेजना
प्रक्षेपण यानह्यूमन-रेटेड LVM3 (HLVM3)
सुरक्षित लैंडिंगभारतीय समुद्री जलक्षेत्र में स्प्लैशडाउन (Splashdown) रिकवरी
आगामी चरणप्रथम मानवरहित परीक्षण उड़ान (G1 Mission)
परीक्षण केंद्रविक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC), तिरुवनंतपुरम

3. राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग पारिस्थितिकी तंत्र की प्रगति

अंतरिक्ष अन्वेषण के साथ-साथ भारत के डिजिटल और कम्प्यूटेशनल बुनियादी ढांचे में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई है। राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के अंतर्गत देश भर में अब तक 68 पेटाफ्लॉप्स (PF) की संयुक्त क्षमता वाले 40 स्वदेशी सुपरकंप्यूटर सक्रिय किए जा चुके हैं। इसमें 1 पेटाफ्लॉप्स से अधिक क्षमता वाले 13 हाई-एंड सिस्टम शामिल हैं। यह उच्च कम्प्यूटेशनल क्षमता मौसम पूर्वानुमान, सौर भौतिकी सिमुलेशन और गगनयान के वायुगतिकीय डेटा विश्लेषण में रीढ़ की हड्डी साबित हो रही है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

आदित्य-L1 प्रक्षेपण तिथि2 सितंबर 2023 (PSLV-C57 द्वारा)
हेलो ऑर्बिट प्रविष्टि6 जनवरी 2024 (L1 बिंदु पर)
VELC निर्माता संस्थानभारतीय ताराभौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु
गगनयान मिशन की कक्षा ऊंचाई400 किलोमीटर (निम्न भू-कक्षा / LEO)
VSSC का मुख्यालयतिरुवनंतपुरम, केरल
भारत की कुल सुपरकंप्यूटिंग क्षमता (NSM)68 पेटाफ्लॉप्स (40 प्रणालियां)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 हाल ही में सूर्य के कोरोना की डॉपलर वेग छवियां तैयार करने वाले ‘VELC’ पेलोड का विकास किस संस्थान द्वारा किया गया है?

Q2 आदित्य-L1 उपग्रह को अंतरिक्ष में किस विशिष्ट स्थिति के चारों ओर हेलो कक्षा (Halo Orbit) में स्थापित किया गया है?

Q3 गगनयान मिशन के संदर्भ में क्रू मॉड्यूल (CM) और सर्विस मॉड्यूल (SM) के पृथक्करण परीक्षण हाल ही में किस केंद्र पर आयोजित किए गए?

Q4 डॉपलर वेग मापन के संदर्भ में जब सौर प्लाज्मा में ‘ऋणात्मक डॉपलर वेग’ (Negative Doppler Velocity) दर्ज किया जाता है, तो इसका क्या तात्पर्य होता है?

Q5 गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को कितने दिनों के लिए और कितनी ऊंचाई वाली कक्षा में भेजने की योजना है?

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