विज्ञान एवं तकनीक

DRDO का हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम परीक्षण और पुन: प्रयोज्य अग्निबाण RLV को ₹200 करोड़ की मंजूरी

DRDO ने समताप मंडल में 21 किमी ऊंचाई पर HAPS का सफल परीक्षण किया; TDB ने अग्निकुल कॉसमॉस को पुन: प्रयोज्य रॉकेट हेतु ₹200 करोड़ का RDI समर्थन प्रदान किया।

⭐ मुख्य बिंदु

  • DRDO की ADRDE आगरा लैब ने समताप मंडल में 21 किमी की ऊंचाई पर स्वदेशी HAPS का सफल परीक्षण किया।
  • HAPS समताप मंडल में स्थिर रहकर लंबे समय तक छद्म उपग्रह (Pseudo-Satellite) की तरह निगरानी और संचार प्रदान करता है।
  • TDB ने पुन: प्रयोज्य अग्निबाण RLV के विकास के लिए अग्निकुल कॉसमॉस को ₹200 करोड़ की RDI सहायता प्रदान की।
  • अग्निबाण RLV परियोजना का उद्देश्य प्रक्षेपण तकनीक को TRL-4 से TRL-8 तक उन्नत करना है।
  • अग्निकुल कॉसमॉस ने विश्व का पहला पेटेंटेड सिंगल-पीस 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन अग्निलेट विकसित किया था।
  • US-India iCET पहल के तहत USISTEF ने AI और क्वांटम प्रौद्योगिकियों में 17 संयुक्त टीमों को सम्मानित किया।
  • पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान प्रणाली से अंतरिक्ष प्रक्षेपण की लागत घटेगी और अंतरिक्ष मलबे पर अंकुश लगेगा।

भारत के अंतरिक्ष और रक्षा प्रौद्योगिकी परिदृश्य में दो युगांतरकारी उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। एक तरफ रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने समताप मंडल (Stratosphere) में लंबे समय तक निगरानी करने में सक्षम स्वदेशी हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम (HAPS) का सफल उड़ान परीक्षण किया है। वहीं दूसरी ओर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत कार्यरत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस को देश के पहले पूर्णतः पुन: प्रयोज्य रॉकेट (Reusable Launch Vehicle) के निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपये का अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) समर्थन स्वीकृत किया है।

1. DRDO का हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम (HAPS): समताप मंडलीय निगरानी में लंबी छलांग

क्या हुआ?

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की आगरा स्थित प्रयोगशाला एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADRDE) ने स्वदेशी रूप से विकसित प्रायोगिक हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम (HAPS) का सफल उड़ान परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान यह मानव-रहित प्लेटफॉर्म समुद्र तल से 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और समताप मंडल में लगभग 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक सफलतापूर्वक स्थिर रहा। इसके पश्चात इसे ग्राउंड कमांड के माध्यम से सुरक्षित वापस उतारा गया।

पृष्ठभूमि एवं कार्यप्रणाली

HAPS हवा से हल्का (Lighter-than-Air) या सौर ऊर्जा चालित मानवरहित हवाई प्लेटफॉर्म होता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के अनुसार 20 से 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर समताप मंडल में संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। यह पारंपरिक उपग्रहों और ड्रोनों के बीच की रणनीतिक खाई को पाटता है:

  • उपग्रहों की तुलना में लाभ: पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) के उपग्रह एक निश्चित समय पर ही किसी क्षेत्र के ऊपर से गुजरते हैं और अत्यधिक महंगे होते हैं। HAPS एक ही स्थान के ऊपर हफ्तों या महीनों तक लगातार स्थिर (Geostationary Hover) रहकर रीयल-टाइम निगरानी कर सकता है।
  • पारंपरिक ड्रोनों की तुलना में लाभ: सामान्य UAVs क्षोभमंडल (Troposphere) में 10-15 किमी की ऊंचाई तक उड़ते हैं और खराब मौसम व ईंधन की कमी से सीमित होते हैं, जबकि समताप मंडल बादलों और वायुमंडलीय उथल-पुथल से मुक्त होता है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु

  • विकासकर्ता प्रयोगशाला: ADRDE (आगरा), जो DRDO की एक प्रमुख अनुसंधान इकाई है।
  • एकीकृत प्रणालियां: प्लेटफॉर्म में इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट (IMU), GPS रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और ऑल्टिट्यूड-कंट्रोल मैकेनिज्म शामिल थे, जिन्होंने रीयल-टाइम डेटा ग्राउंड स्टेशन को भेजा।
  • रणनीतिक उपयोग: सीमाओं और समुद्री तटों पर निरंतर खुफिया निगरानी और टोही (ISR), आपदा प्रबंधन में त्वरित संचार नेटवर्क, और सुरक्षित 5G/6G टेलीकॉम रिले स्टेशन।
  • सहयोगी संस्थाएं: इस परीक्षण में भारतीय वायु सेना (IAF), CEMILAC, नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने समन्वय स्थापित किया।

2. अग्निबाण RLV: TDB-DST ने पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान हेतु दिए ₹200 करोड़

क्या हुआ?

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन सांविधिक निकाय प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने चेन्नई स्थित स्पेस-टेक स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस प्राइवेट लिमिटेड के साथ ₹200 करोड़ की वित्तीय सहायता के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह फंडिंग सरकार के अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) कोष के तहत ‘ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स’ (OCD) के रूप में दी गई है।

पृष्ठभूमि एवं तकनीकी संरचना

अग्निकुल कॉसमॉस ने इससे पहले विश्व के पहले सिंगल-पीस 3D-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन ‘अग्निलेट’ (Agnilet) का विकास कर ‘अग्निबाण सॉर्टेड’ (SOrTeD) मिशन को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था। इस नए समझौते का मुख्य उद्देश्य इस तकनीक को प्रयोगशाला स्तर से आगे ले जाकर पूर्ण-प्रणाली पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (Full-System Reusable Launch Vehicle) तैयार करना है।

वर्तमान में वैश्विक स्तर पर अधिकांश रॉकेट केवल पहले चरण (First Stage) को पुनः प्राप्त करने पर केंद्रित हैं। इसके विपरीत अग्निबाण RLV परियोजना में अपर-स्टेज (Upper Stage) की नियंत्रित वापसी, री-एंट्री थर्मल शील्ड और रिकवरी सिस्टम को शामिल किया गया है, जिससे संपूर्ण प्रक्षेपण प्रणाली को बार-बार उपयोग में लाया जा सके।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु

  • तकनीकी परिपक्वता (TRL वृद्धि): इस वित्तपोषण का लक्ष्य अग्निबाण RLV को TRL-4 (प्रयोगशाला सत्यापन) से TRL-8 (सिस्टम पूर्णता एवं उड़ान योग्यता) तक ले जाना है।
  • सेमी-क्रायोजेनिक प्रणोदन: इसमें डीप थ्रॉटलिंग और री-स्टार्ट (पुनः प्रज्वलन) क्षमता से लैस तरल ईंधन इंजन का उपयोग किया जा रहा है, जो रॉकेट की सॉफ्ट-लैंडिंग के लिए अपरिहार्य है।
  • अंतरिक्ष मलबे में कमी: रॉकेट के सभी हिस्सों की रिकवरी से लो-अर्थ ऑर्बिट में अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) की समस्या कम होगी और उपग्रह प्रक्षेपण की लागत में 70% तक गिरावट आ सकेगी।

3. इंडो-यूएस iCET साझेदारी: उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए 17 द्विपक्षीय पुरस्कार

भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक प्रौद्योगिकी सहयोग को गति देते हुए यूएस-इंडिया साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंडोमेंट फंड (USISTEF) के तहत 17 संयुक्त टीमों को अनुसंधान पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। यह पहल क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज (iCET) के ढांचे के अंतर्गत संचालित है।

ये 17 संयुक्त टीमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) समर्थित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, जनरेटिव एआई और क्वांटम संचार प्रौद्योगिकियों (विशेष रूप से क्वांटम सेंसर्स और क्वांटम कुंजी वितरण) के व्यावसायीकरण पर कार्य करेंगी। इससे दोनों देशों के रक्षा, स्वास्थ्य और रणनीतिक क्षेत्रों में स्वदेशी नवोन्मेष को नई दिशा मिलेगी।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

HAPS परीक्षण की अधिकतम ऊंचाई21 किलोमीटर (समताप मंडल)
HAPS विकासकर्ता प्रयोगशालाADRDE, आगरा (DRDO)
अग्निकुल कॉसमॉस को TDB सहायता₹200 करोड़ (RDI फंड के तहत)
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) स्थापना वर्ष1996 (TDB अधिनियम, 1995)
अग्निबाण का 3D-प्रिंटेड इंजनअग्निलेट (Agnilet)
iCET पहल की शुरुआतमई 2022 (भारत एवं संयुक्त राज्य अमेरिका)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

स्कोर 0 / 5

👆 सही विकल्प पर क्लिक करें — तुरंत पता चलेगा सही है या गलत।

Q1 हाल ही में DRDO द्वारा समताप मंडल में 21 किमी की ऊंचाई पर परीक्षित 'HAPS' का पूर्ण रूप क्या है?

Q2 DRDO की किस अनुसंधान प्रयोगशाला ने स्वदेशी हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम (HAPS) को डिजाइन और विकसित किया है?

Q3 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने पूर्णतः पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (RLV) के लिए किस भारतीय स्टार्टअप को ₹200 करोड़ का वित्तीय समर्थन दिया है?

Q4 प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (Technology Readiness Level - TRL) पैमाने के संदर्भ में 'TRL-8' किस चरण को प्रदर्शित करता है?

Q5 भारत और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर रणनीतिक रूपरेखा 'iCET' का नेतृत्व किन अधिकारियों द्वारा किया जाता है?

स्रोत