बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027, त्रि-पथ कॉरिडोर और पहली AI नीति-2026 को मंजूरी
बिहार सरकार ने ₹2 लाख करोड़ के निवेश लक्ष्य के साथ 'बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027' पोर्टल लॉन्च किया, तीन नए नदी एक्सप्रेसवे कॉरिडोर और राज्य की पहली AI नीति-2026 को मंजूरी दी।
⭐ मुख्य बिंदु
- बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027 पोर्टल और ‘बिहार है तैयार’ अभियान का शुभारंभ किया गया।
- ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 के जरिए ₹2 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों का लक्ष्य रखा गया है।
- बिहार फाउंडेशन के 55 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय चैप्टर दुनिया भर में प्रवासी बिहारियों को जोड़ेंगे।
- कैबिनेट ने 220 किमी लंबे तीन नदी एक्सप्रेसवे कॉरिडोर—विश्वामित्र पथ, गंगा अंबिका पथ और नारायणी पथ को मंजूरी दी।
- मनेर-आरा-बक्सर को जोड़ने वाला 90 किमी लंबा ‘विश्वामित्र पथ’ पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से सीधा संपर्क स्थापित करेगा।
- कॉरिडोर परियोजनाओं के डीपीआर व सलाहकार सेवाओं हेतु ₹37.10 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
- राज्य में उन्नत ई-गवर्नेंस व तकनीकी नवाचार हेतु ‘बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नीति-2026’ स्वीकृत हुई।
- पटना शहर में यातायात सुगमता के लिए भूमिगत सड़क नेटवर्क के फिजिबिलिटी अध्ययन को हरी झंडी मिली।
बिहार में औद्योगिक निवेश, उन्नत सड़क अवसंरचना और डिजिटल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक पहलों की शुरुआत की है। वैश्विक स्तर पर प्रवासी बिहारियों और निवेशकों को राज्य से जोड़ने के लिए ‘बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027’ पोर्टल और ‘बिहार है तैयार’ अभियान का शुभारंभ किया गया है। इसके साथ ही, कैबिनेट ने विश्वामित्र पथ, गंगा अंबिका पथ और नारायणी पथ जैसे 220 किलोमीटर लंबे चार-लेन नदी तटीय कॉरिडोर और राज्य की पहली ‘बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नीति-2026’ को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की है।
1. बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027 और ‘बिहार है तैयार’ अभियान
क्या हुआ?
मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभागार से ‘बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027’ के आधिकारिक पोर्टल और बिहार फाउंडेशन की अद्यतन वेबसाइट का शुभारंभ किया गया। राज्य सरकार ने फरवरी 2027 में प्रस्तावित इस मेगा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से ₹2 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव आकर्षित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस अवसर पर ‘बिहार है तैयार’ थीम आधारित अभियान की शुरुआत हुई, जिसमें अमेरिका, जापान, जर्मनी और खाड़ी देशों सहित दुनिया भर में फैले बिहार फाउंडेशन के 55 विदेशी व घरेलू चैप्टरों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य
बिहार सरकार ने वर्ष 2006 में वैश्विक स्तर पर रहने वाले प्रवासी बिहारियों के ज्ञान, कौशल, अनुभव और पूंजी को राज्य के विकास से जोड़ने के लिए ‘बिहार फाउंडेशन’ का गठन किया था। पूर्ववर्ती निवेशक सम्मेलनों (इन्वेस्टर्स मीट) की सफलता के बाद अब राज्य को विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, आईटी और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने के लिए यह नई पहल की गई है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- नोडल संस्था: उद्योग विभाग, बिहार सरकार एवं बिहार फाउंडेशन।
- थीम: ‘बिहार है तैयार’ (औद्योगिक विस्तार और निवेश अनुकूल नीतियों पर आधारित)।
- निवेश लक्ष्य: ₹2,00,000 करोड़ का सकल औद्योगिक निवेश।
- वैश्विक पहुंच: 55 अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय चैप्टरों के माध्यम से अनिवासी बिहारियों (NRBs) की सीधी भागीदारी।
2. बुनियादी ढांचा: विश्वामित्र पथ, गंगा अंबिका पथ और नारायणी पथ कॉरिडोर
क्या हुआ?
राज्य कैबिनेट ने गंगा और गंडक नदी घाटियों में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने के लिए तीन नए चार-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और ट्रांजैक्शन एडवाइजर सेवाओं के लिए ₹37.10 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। यह परियोजनाएं बिहार राज्य पथ विकास निगम (BSRDCL) द्वारा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर क्रियान्वित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, पटना में सुगम यातायात के लिए ₹18.21 करोड़ की लागत से भूमिगत (सबटेरेनियन) रोड नेटवर्क की व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) को भी हरी झंडी दी गई है।
कॉरिडोर का विवरण
- विश्वामित्र पथ (90 किमी): यह चार-लेन ग्रीनफील्ड मार्ग मनेर से शुरू होकर आरा होते हुए बक्सर तक गंगा नदी के तटबंध के समानांतर बनेगा। यह जेपी गंगा पथ (पटना मरीन ड्राइव) के पश्चिमी विस्तार के रूप में कार्य करेगा और बिहार को उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से उच्च गति से जोड़ेगा।
- गंगा अंबिका पथ (56 किमी): गंगा नदी के उत्तरी किनारे पर बिदुपुर (वैशाली) से दिघवारा (सारण) के बीच संपर्क मार्ग।
- नारायणी पथ (73.51 किमी): गंडक (नारायणी) नदी क्षेत्र में गोपालगंज जिले के दरीहरा (कोन्हुआ) से डुमरियाघाट तक का तीव्र संपर्क गलियारा।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- कुल लंबाई: लगभग 219.51 किमी (लगभग 220 किमी)।
- मॉडल: पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP मॉडल)।
- रणनीतिक महत्व: पटना-दिल्ली मार्ग पर यात्रा के समय में भारी कमी, बाढ़ सुरक्षा तटबंधों का सुदृढ़ीकरण और पश्चिमी बिहार में लॉजिस्टिक्स लागत में कमी।
3. डिजिटल सुशासन: बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नीति-2026
क्या हुआ?
प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने, डेटा-आधारित त्वरित निर्णय लेने और युवाओं को भविष्योन्मुखी तकनीकी कौशल से लैस करने के उद्देश्य से बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नीति-2026 को मंजूरी दी गई। इसके अंतर्गत राज्य स्तर पर ‘बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन’ का गठन किया जाएगा और एक समर्पित AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) स्थापित किया जाएगा।
प्रमुख उद्देश्य और कार्ययोजना
- एआई कौशल विकास (Skill Development): आगामी पाँच वर्षों में इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक और सामान्य स्नातक छात्रों को मशीन लर्निंग, जनरेटिव एआई और डेटा एनालिटिक्स में विशेष प्रशिक्षण।
- कृषि और आपदा प्रबंधन में उपयोग: उपग्रह डेटा और एआई एल्गोरिदम के माध्यम से बाढ़ पूर्वानुमान, फसल नुकसान का सटीक आकलन और मौसम चेतावनी प्रणाली।
- ई-गवर्नेंस एवं नागरिक सेवाएं: जन-शिकायत निवारण और सरकारी योजनाओं के प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) में विसंगतियों की पहचान के लिए एआई टूल्स का उपयोग।
परियोजनाओं का तुलनात्मक सार
| योजना / नीति | संबंधित विभाग | मुख्य प्रावधान / लक्ष्य |
|---|---|---|
| बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027 | उद्योग विभाग | ₹2 लाख करोड़ निवेश, 55 वैश्विक चैप्टरों से जुड़ाव |
| त्रि-पथ कॉरिडोर (220 किमी) | पथ निर्माण विभाग (BSRDCL) | विश्वामित्र (90 किमी), गंगा अंबिका (56 किमी), नारायणी पथ (73.51 किमी) |
| बिहार AI नीति-2026 | सूचना प्रावैधिकी (IT) विभाग | AI मिशन गठन, कौशल संवर्धन, ई-गवर्नेंस में एआई उपयोग |
| पटना भूमिगत सड़क अध्ययन | नगर विकास एवं आवास विभाग | ₹18.21 करोड़ की लागत से व्यवहार्यता अध्ययन |
स्टेटिक जीके लिंकेज (Static GK Connection)
- बक्सर का ऐतिहासिक व पौराणिक संदर्भ: विश्वामित्र पथ का नामकरण महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि बक्सर के नाम पर किया गया है। ऐतिहासिक दृष्टि से 22 अक्टूबर 1764 को लड़ा गया ‘बक्सर का युद्ध’ (हेक्टर मुनरो बनाम मीर कासिम, शुजाउद्दौला और शाह आलम द्वितीय) भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़ था।
- गंडक नदी (नारायणी): वैदिक साहित्य में इसे ‘सदाणीरा’ कहा गया है। यह नेपाल के हिमालयी क्षेत्र से निकलकर बिहार के पश्चिमी चंपारण (वाल्मीकि नगर) से राज्य में प्रवेश करती है और पहलेजा/सोनपुर के पास गंगा में मिलती है।
- BSRDCL: बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की स्थापना कंपनी अधिनियम के तहत बिहार सरकार द्वारा बड़े राजमार्गों और पुलों के निर्माण हेतु की गई थी।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| बिजनेस कनेक्ट 2027 निवेश लक्ष्य | ₹2,00,000 करोड़ |
|---|---|
| बिहार फाउंडेशन के वैश्विक चैप्टर | 55 चैप्टर |
| विश्वामित्र पथ की लंबाई | 90 किलोमीटर (मनेर से बक्सर) |
| गंगा अंबिका पथ की लंबाई | 56 किलोमीटर (बिदुपुर से दिघवारा) |
| नारायणी पथ की लंबाई | 73.51 किलोमीटर (गोपालगंज जिला) |
| कॉरिडोर सलाहकार सेवा आवंटन | ₹37.10 करोड़ |
| कॉरिडोर निर्माण नोडल एजेंसी | BSRDCL (PPP मॉडल) |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 बिहार सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027’ पोर्टल का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
Q2 कैबिनेट द्वारा स्वीकृत 90 किलोमीटर लंबा चार-लेन ‘विश्वामित्र पथ’ किन दो प्रमुख स्थानों को जोड़ेगा?
Q3 बिहार में हाल ही में स्वीकृत ‘नारायणी पथ’ किस नदी बेसिन क्षेत्र में 73.51 किमी लंबा संपर्क मार्ग प्रदान करेगा?
Q4 बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नीति-2026 के क्रियान्वयन हेतु राज्य स्तर पर किस संस्था के गठन का निर्णय लिया गया है?
Q5 प्राचीन वैदिक साहित्य में ‘सदाणीरा’ नाम से किस नदी का उल्लेख मिलता है, जिस पर हाल ही में नया एक्सप्रेसवे कॉरिडोर स्वीकृत हुआ है?







