सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड हेतु ‘FAR’ का विस्तार और RBI के तीन प्रमुख उपभोक्ता व मुद्रास्फीति सर्वेक्षण
आरबीआई ने 10-वर्षीय सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड को एफएआर मार्ग में शामिल किया और आगामी द्विमासिक मौद्रिक नीति से पहले तीन प्रमुख राष्ट्रीय सर्वेक्षण शुरू किए।
⭐ मुख्य बिंदु
- आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के 10-वर्षीय सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड को फुल्ली एक्सेसिबल रूट (FAR) में शामिल किया।
- FAR मार्ग के तहत गैर-निवासी निवेशक चुनिंदा सरकारी प्रतिभूतियों में बिना किसी निवेश सीमा के निवेश कर सकते हैं।
- सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड से जुटाई गई राशि का उपयोग पर्यावरण-अनुकूल संधारणीय परियोजनाओं के लिए किया जाता है।
- आरबीआई ने द्विमासिक मौद्रिक नीति के इनपुट हेतु मुद्रास्फीति प्रत्याशा (IESH) और उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (UCCS/RCCS) शुरू किए।
- IESH और UCCS सर्वेक्षण 19 प्रमुख शहरों में, जबकि ग्रामीण सर्वेक्षण (RCCS) 31 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में संचालित किया जा रहा है।
- भारत में वैधानिक मुद्रास्फीति लक्ष्य 4% है, जिसकी सहिष्णुता सीमा +/- 2% (2% से 6%) निर्धारित है।
- FPI द्वारा 10% इक्विटी सीमा का उल्लंघन होने पर उसे FDI में पुनर्वर्गीकृत करने के लिए आरबीआई ने नई परिचालन रूपरेखा जारी की।
- यह विनियामक सुधार बाज़ार में दबावपूर्ण बिकवाली को रोकने और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सुगम बनाने में सहायक होगा।
1. 10-वर्षीय सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड ‘फुल्ली एक्सेसिबल रूट’ (FAR) में शामिल
क्या हुआ?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भारत सरकार के परामर्श से गैर-निवासी (विदेशी) निवेशकों के लिए 10-वर्षीय अवधि वाले सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (Sovereign Green Bonds - SGrBs) को फुल्ली एक्सेसिबल रूट (Fully Accessible Route - FAR) के तहत निवेश के लिए निर्दिष्ट प्रतिभूतियों की सूची में शामिल करने की अधिसूचना जारी की है। इस निर्णय के अंतर्गत चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में जारी किए जा रहे 10-वर्षीय ग्रीन बॉन्ड में विदेशी निवेशक बिना किसी सीमा (Ceiling) के सीधे निवेश कर सकेंगे।
पृष्ठभूमि
आरबीआई ने 30 मार्च 2020 को केंद्र सरकार के परामर्श से ‘FAR’ योजना शुरू की थी। इसका प्राथमिक उद्देश्य चुनिंदा सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) को विदेशी निवेशकों के लिए बिना किसी समग्र सीमा के खोलना था, जिससे वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों (जैसे जे.पी. मॉर्गन जीबीआई-ईएम इंडेक्स) में भारत के शामिल होने का मार्ग प्रशस्त हुआ। भारत सरकार ने वर्ष 2022 में हरित बुनियादी ढाँचे, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन और कार्बन तीव्रता घटाने वाली परियोजनाओं के वित्तपोषण हेतु सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क अधिसूचित किया था।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (SGrB): यह सरकार द्वारा जारी ऋण साधन है, जिससे प्राप्त राशि का उपयोग केवल पर्यावरण-अनुकूल और संधारणीय परियोजनाओं में किया जाता है। इसकी राशि भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा होती है।
- FAR की कार्यप्रणाली: इसमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) सामान्य सीमा (General Category Limit) के प्रतिबंधों से मुक्त होकर निर्धारित प्रतिभूतियों में असीमित निवेश कर सकते हैं।
- आर्थिक प्रभाव: इससे देश में डॉलर प्रवाह बढ़ेगा, विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिलेगा और हरित संक्रमण (Green Transition) के लिए रियायती वैश्विक पूंजी उपलब्ध होगी।
2. मौद्रिक नीति हेतु RBI के तीन प्रमुख अग्रगामी (Forward-Looking) सर्वेक्षण शुरू
क्या हुआ?
आगामी द्विमासिक मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक की तैयारी के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक ने नवंबर दौर के तीन व्यापक घरेलू सर्वेक्षणों की शुरुआत की है: परिवारों का मुद्रास्फीति प्रत्याशा सर्वेक्षण (IESH), शहरी उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (UCCS) और ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (RCCS)। ये सर्वेक्षण घरेलू खपत, आय, रोज़गार और मुद्रास्फीति की अग्रिम धारणाओं का आँकलन करते हैं।
पृष्ठभूमि
मौद्रिक नीति तैयार करने में रिज़र्व बैंक केवल ऐतिहासिक या वर्तमान आँकड़ों पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि भविष्य की मूल्य और मांग प्रवृत्तियों का सटीक पूर्वानुमान लगाने के लिए उपभोक्ता स्तर के सर्वेक्षण संचालित करता है। आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के तहत गठित छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) के निर्णयों में इन सर्वेक्षणों से प्राप्त मात्रात्मक और गुणात्मक आँकड़े निर्णायक इनपुट की भूमिका निभाते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
| सर्वेक्षण का नाम | भौगोलिक दायरा | प्रमुख उद्देश्य |
|---|---|---|
| IESH (मुद्रास्फीति प्रत्याशा) | 19 प्रमुख शहर (शहरी क्षेत्र) | अगले 3 महीने और 1 वर्ष में परिवारों की मुद्रास्फीति संबंधी धारणाओं का मापन |
| UCCS (शहरी उपभोक्ता विश्वास) | 19 प्रमुख शहर | सामान्य आर्थिक स्थिति, रोज़गार, घरेलू व्यय और आय पर शहरी नागरिकों का विश्वास सूचकांक (CSI) |
| RCCS (ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास) | 31 राज्य व केंद्रशासित प्रदेश | ग्रामीण मांग, कृषि आय, उपभोग व्यय और स्थानीय रोज़गार की जमीनी प्रवृत्तियों का आँकलन |
- मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचा: भारत में आरबीआई को 4% उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति बनाए रखने का वैधानिक लक्ष्य सौंपा गया है, जिसमें 2% की सहिष्णुता सीमा (+/- 2%) यानी 2% से 6% का बैंड है।
- मौद्रिक संचरण (Monetary Transmission): यदि मुद्रास्फीति प्रत्याशाएं नियंत्रित रहती हैं, तो केंद्रीय बैंक को नीतिगत दरों (Repo Rate) में ढील देने या आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करने में आसानी होती है।
3. FPI से FDI में पुनर्वर्गीकरण हेतु नया परिचालन ढांचा
क्या हुआ?
आरबीआई और सेबी ने फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999) के गैर-ऋण साधन नियमों के तहत एक परिचालन रूपरेखा अधिसूचित की है, जिसके तहत यदि किसी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) की किसी भारतीय कंपनी में शेयरधारिता 10% की वैधानिक सीमा का उल्लंघन करती है, तो उसे त्वरित निकासी (Divestment) के स्थान पर अपनी होल्डिंग को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में पुनर्वर्गीकृत करने की अनुमति दी गई है।
पृष्ठभूमि
विदेशी विनिमय प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियमावली, 2019 के अंतर्गत, FPI को किसी एकल कंपनी की चुकता इक्विटी पूंजी का अधिकतम 9.99% हिस्सा रखने की ही अनुमति होती है। पहले 10% या उससे अधिक होने पर निवेशक को अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता था, जिससे बाज़ार में अस्थिरता पैदा होती थी। अब श्रेणी-I अधिकृत डीलर बैंकों (AD Banks) के माध्यम से तय समय में इसका पुनर्वर्गीकरण संभव होगा।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- FPI बनाम FDI: किसी भारतीय कंपनी में 10% से कम की इक्विटी निवेश को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) माना जाता है, जबकि 10% या उससे अधिक की प्रत्यक्ष शेयरधारिता को ‘FDI’ का दर्जा प्राप्त होता है, जो दीर्घकालिक प्रबंधन नियंत्रण को दर्शाता है।
- व्यवसाय सुगमता (Ease of Doing Business): इस विनियामक लचीलेपन से विदेशी संस्थागत निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा तथा भारतीय कंपनियों को स्थिर दीर्घकालिक पूंजी प्राप्त होगी।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| फुल्ली एक्सेसिबल रूट (FAR) की शुरुआत | मार्च 2020 |
|---|---|
| मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचा (बैंड) | 4% (+/- 2% सहिष्णुता सीमा) |
| FPI और FDI का सीमांकन थ्रेशोल्ड | चुकाए गए इक्विटी का 10% |
| मौद्रिक नीति समिति (MPC) के कुल सदस्य | 6 सदस्य (3 RBI + 3 केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त) |
| ग्रामीण उपभोक्ता सर्वेक्षण (RCCS) का दायरा | 31 राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा शुरू किए गए ‘फुल्ली एक्सेसिबल रूट’ (FAR) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
Q2 सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (SGrBs) से जुटाई गई निधियों को निम्नलिखित में से किसमें जमा किया जाता है?
Q3 भारतीय रिज़र्व बैंक के मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचे के तहत CPI मुद्रास्फीति का लक्ष्य और स्वीकार्य दायरा (Tolerance Band) क्या है?
Q4 भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा संचालित ‘शहरी उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण’ (UCCS) कितने प्रमुख शहरों में आयोजित किया जाता है?
Q5 फेमा (गैर-ऋण साधन) नियमों के अनुसार, किसी भारतीय कंपनी में एक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) की होल्डिंग कितने प्रतिशत से अधिक होने पर उसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है?







