विज्ञान एवं तकनीक

स्वदेशी एआई चिप्स हेतु डीआरडीओ का रोडमैप और आईसीएमआर का 'फर्स्ट इन द वर्ल्ड' चैलेंज

डीआरडीओ ने स्वदेशी रक्षा चिप्स व एआई एसओसी का खाका पेश किया, आईसीएमआर ने वैश्विक स्वास्थ्य शोध के लिए 'फर्स्ट इन द वर्ल्ड' चैलेंज और नई स्वास्थ्य नीति जारी की।

⭐ मुख्य बिंदु

  • डीआरडीओ ने रक्षा प्रणालियों के लिए स्वदेशी सेमीकंडक्टर और एआई सिस्टम-ऑन-चिप्स (SoCs) का रोडमैप प्रस्तुत किया।
  • डीआरडीओ की यह पहल सिलिकॉन एज कंप्यूटिंग और सुरक्षित संचार माइक्रोप्रोसेसर के विकास पर केंद्रित है।
  • आईसीएमआर और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग ने 'DHR-ICMR 2024-29 एक्शन प्लान' जारी किया।
  • चंद्रयान-3 की सफलता से प्रेरित होकर चिकित्सा क्षेत्र में 'फर्स्ट इन द वर्ल्ड' चैलेंज शुरू किया गया।
  • आई-राइज (I-RISE) नीति के माध्यम से शोधकर्ताओं के लिए आईसीएमआर प्रयोगशाला नेटवर्क सुलभ कराया गया।
  • सीएसआईआर-नीस्ट ने 20 प्रतिशत प्रोटीन और 54 ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला विशेष 'डिज़ाइनर राइस' विकसित किया।
  • तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर इनडोर सौर ऊर्जा से संचालित भारत का पहला वायु निगरानी उपकरण 'पवनचित्रा' स्थापित हुआ।

1. रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स में आत्मनिर्भरता: डीआरडीओ का सेमीकंडक्टर व एआई-चिप रोडमैप

क्या हुआ?

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व रक्षा परिदृश्य को सशक्त करने के लिए ‘सेमीकंडक्टर्स और नेक्स्ट-जेनरेशन चिप्स’ पर एक विस्तृत तकनीकी खाका प्रस्तुत किया है। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय तकनीकी सत्र में डीआरडीओ के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार प्रणाली (ECS) महानिदेशालय और माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज महानिदेशालय ने देश के अग्रणी वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के साथ मिलकर स्वदेशी चिप डिजाइनिंग की दिशा तय की। इसमें विशेष रूप से एआई सिस्टम-ऑन-चिप्स (AI System-on-Chips - SoCs), सिलिकॉन एज कंप्यूटिंग (Silicon Edge Intelligence), और रक्षा अनुप्रयोगों के लिए अनुकूलित माइक्रोप्रोसेसर के विकास पर जोर दिया गया।

पृष्ठभूमि एवं सामरिक आवश्यकता

आधुनिक युद्ध प्रणालियों, मिसाइल गाइडेंस, रडार, एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) में उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स की केंद्रीय भूमिका होती है। भारत वर्तमान में महत्वपूर्ण और सामरिक चिप्स के लिए विदेशी फाउंड्री और आयात पर अत्यधिक निर्भर रहा है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में अवरोधों को देखते हुए डीआरडीओ ने रक्षा उद्योग, स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों के साथ मिलकर एक त्रि-स्तरीय ढांचा तैयार किया है, ताकि देश में ही उच्च-विश्वसनीयता (Rad-Hardened और सैन्य-ग्रेड) वाले सेमीकंडक्टर तैयार किए जा सकें।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु

  • सिलिकॉन एज इंटेलिजेंस: डेटा को केंद्रीय सर्वर या क्लाउड पर भेजने के बजाय सीधे सेंसर/डिवाइस स्तर पर प्रोसेस करने की तकनीक, जो इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के समय अत्यंत उपयोगी है।
  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM): भारत सरकार के ₹76,000 करोड़ के इस मिशन से डीआरडीओ की यह पहल सीधे जुड़ती है।
  • दोहरे उपयोग वाली तकनीकें (Dual-Use Tech): ये चिप्स न केवल नौसेना, वायुसेना और थलसेना के संचार तंत्र को सुरक्षित करेंगे, बल्कि नागरिक दूरसंचार व स्वायत्त वाहनों में भी काम आएंगे।

2. वैश्विक चिकित्सा नवाचार: आईसीएमआर का 'फर्स्ट इन द वर्ल्ड' चैलेंज और 2024-29 एक्शन प्लान

क्या हुआ?

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भारत को वैश्विक चिकित्सा नवाचार का केंद्र बनाने के उद्देश्य से ‘DHR-ICMR 2024-29 एक्शन प्लान’ तथा पांच प्रमुख स्वास्थ्य अनुसंधान पहलें शुरू की हैं। इनमें सबसे महत्वाकांक्षी पहल 'फर्स्ट इन द वर्ल्ड' (First in the World) चैलेंज है, जो चंद्रयान-3 की अभूतपूर्व सफलता से प्रेरित है। इसके तहत भारतीय वैज्ञानिकों को ऐसी स्वास्थ्य तकनीकों, टीकों, बायोमेडिकल उपकरणों और उपचार पद्धतियों के विकास के लिए वित्तपोषण दिया जाएगा, जिनका निर्माण विश्व में पहले कभी नहीं हुआ हो।

पृष्ठभूमि एवं प्रमुख उद्देश्य

भारत अब तक मुख्य रूप से 'जेनेरिक दवाओं की फार्मेसी' के रूप में जाना जाता रहा है, किंतु मौलिक बायोमेडिकल अनुसंधान और पेटेंटेड अत्याधुनिक दवाओं के क्षेत्र में देश का हिस्सा सीमित था। विकसित भारत लक्ष्य के अनुरूप, आईसीएमआर का यह पंचवर्षीय रोडमैप उच्च-जोखिम, उच्च-प्रतिफल (High-Risk, High-Reward) वाले अनुसंधानों को पूंजी और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएगा। इसके अतिरिक्त अनुसंधान अवसंरचना साझा करने हेतु आई-राइज (I-RISE) नीति लागू की गई है, जिसके जरिए निजी और सार्वजनिक शोधकर्ताओं को आईसीएमआर की उच्च-स्तरीय प्रयोगशालाओं तक पहुंच मिलेगी।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु

  • पीएम-अभिमान (PM-ABHIM): प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत देश भर में परीक्षण और डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
  • आई-ड्रोन (i-Drone) पहल: दुर्गम क्षेत्रों में टीकों, रक्त घटकों और आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं के त्वरित वितरण के लिए ड्रोन आधारित लॉजिस्टिक्स का विस्तार।
  • फंडिंग मॉडल: 'फर्स्ट इन द वर्ल्ड' चैलेंज के तहत प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट से लेकर प्रोटोटाइप और क्लिनिकल ट्रायल तक सभी चरणों में वित्तीय सहायता दी जाएगी।

3. कृषि व सतत ऊर्जा में सीएसआईआर के नए आविष्कार: डिज़ाइनर राइस और पवनचित्रा

क्या हुआ?

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के अंतर्गत तिरुवनंतपुरम स्थित राष्ट्रीय अंतःविषय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIR-NIIST) ने दो महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धियां प्रदर्शित की हैं: पहला, अत्यधिक उच्च-प्रोटीन और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला ‘सीएसआईआर डिज़ाइनर राइस’ (CSIR Designer Rice) और दूसरा, भारत का पहला ऑफ-ग्रिड इनडोर सोलर आधारित वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र ‘पवनचित्रा’ (PavanaChitra)।

पृष्ठभूमि व तकनीकी विशेषताएं

सामान्य सफेद चावल में प्रोटीन की मात्रा मात्र 6 से 8 प्रतिशत होती है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) अत्यधिक उच्च (70 से ऊपर) होता है, जो मधुमेह रोगियों के लिए हानिकारक माना जाता है। सीएसआईआर-नीस्ट द्वारा संरचनात्मक संशोधन (Structural Modification) तकनीक से तैयार किए गए डिज़ाइनर राइस में लगभग 20 प्रतिशत प्रोटीन है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स केवल 54 (लो-जीआई श्रेणी) है। वहीं, 'पवनचित्रा' तकनीक को तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थापित किया गया है, जो बिना बाहरी बिजली के, केवल इनडोर सोलर सेल की रोशनी से संचालित होकर लगातार वायु गुणवत्ता पर नज़र रखती है।

नवाचार / तकनीकविकासकर्ता संस्थानप्रमुख विशेषतासामाजिक व आर्थिक प्रभाव
एआई सिस्टम-ऑन-चिप्स (SoC)DRDO (ईसीएस प्रभाग)सैन्य-ग्रेड एज कंप्यूटिंगआयात निर्भरता में कमी, सुरक्षित रक्षा संचार
फर्स्ट इन द वर्ल्ड चैलेंजDHR - ICMRअभूतपूर्व बायोमेडिकल तकनीकेंवैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान में भारत का नेतृत्व
सीएसआईआर डिज़ाइनर राइसCSIR-NIIST20% प्रोटीन, 54 जीआई इंडेक्सकुपोषण निवारण और मधुमेह नियंत्रण में सहायक
पवनचित्रा (PavanaChitra)CSIR-NIISTइनडोर सोलर-संचालित वायु सेंसरहवाई अड्डों व सार्वजनिक भवनों में सतत ग्रीन मॉनिटरिंग

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

डीआरडीओ स्थापना वर्ष1958
आईसीएमआर (ICMR) मुख्यालयनई दिल्ली
आईसीएमआर के महानिदेशकडॉ. राजीव बहल
सीएसआईआर (CSIR) स्थापना वर्ष1942
सीएसआईआर-नीस्ट (NIIST) स्थानतिरुवनंतपुरम, केरल
डिज़ाइनर राइस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI)54 (कम जीआई श्रेणी)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 हाल ही में चिकित्सा क्षेत्र में अभूतपूर्व नवाचारों और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 'फर्स्ट इन द वर्ल्ड' (First in the World) चैलेंज किस संस्था द्वारा शुरू किया गया?

Q2 डीआरडीओ द्वारा हाल ही में रक्षा प्रणालियों और स्वायत्त हथियारों के लिए किस प्रकार की विशेष चिप तकनीक के स्वदेशी विकास पर बल दिया गया?

Q3 सीएसआईआर-नीस्ट (CSIR-NIIST) द्वारा विकसित 'डिजाइनर राइस' की प्रमुख विशेषता क्या है?

Q4 भारत का पहला इनडोर सौर सेल चालित वायु गुणवत्ता निगरानी उपकरण 'पवनचित्रा' (PavanaChitra) किस हवाई अड्डे पर स्थापित किया गया?

Q5 अनुसंधान अवसंरचना साझाकरण तंत्र 'आई-राइज' (I-RISE) नीति का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

स्रोत