डीआरडीओ के लड़ाकू वाहन ‘विक्रम VT-21’ का सफल परीक्षण और भारत का क्वांटम-सुरक्षित 6G विज़न
डीआरडीओ के अगली पीढ़ी के इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल ‘विक्रम VT-21’ ने विकासात्मक परीक्षणों में अहम पड़ाव पार किया, वहीं दूरसंचार विभाग ने सुरक्षित 6G और पोस्ट-क्वांटम नेटवर्क रोडमैप प्रस्तुत किया।
⭐ मुख्य बिंदु
- डीआरडीओ की प्रयोगशाला वीआरडीई ने नेक्स्ट-जेन बख्तरबंद वाहन विक्रम VT-21 का सफल परिचालन परीक्षण पूरा किया।
- विक्रम VT-21 को भारतीय सेना के पुराने बीएमपी-2 ‘सारथ’ इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स को बदलने के लिए तैयार किया गया है।
- यह लड़ाकू वाहन 30 मिमी मानवरहित बुर्ज, नाग एमके-2 एटीजीएम और हाइड्रो-जेट उभयचर तकनीक से लैस है।
- दूरसंचार विभाग (DoT) ने टीटीडीएफ (TTDF) के तहत ₹500 करोड़ की 130 से अधिक परियोजनाओं को वित्तपोषित किया है।
- भारत के ‘6G विज़न 2030’ का लक्ष्य 1 टीबीपीएस तक की स्पीड और सब-माइक्रोसेकंड लेटेंसी के साथ वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है।
- भविष्य के साइबर खतरों से निपटने के लिए क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी का एकीकरण किया जा रहा है।
- टीडीआईपी (TDIP) योजना को दूरसंचार स्टार्टअप्स और एमएसएमई के समर्थन के लिए वर्ष 2031 तक विस्तारित किया गया है।
भारत के रक्षा और दूरसंचार अनुसंधान क्षेत्रों में दो अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की प्रयोगशाला वीआरडीई (VRDE) द्वारा विकसित नेक्स्ट-जेनरेशन इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल ‘विक्रम VT-21’ ने अपने व्हील्ड वेरिएंट के प्रमुख विकासात्मक परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। वहीं दूसरी ओर, नई दिल्ली में आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) के दौरान दूरसंचार विभाग (DoT) ने भारत के भविष्य के सुरक्षित, एआई-संचालित 6G नेटवर्क और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी के रणनीतिक रोडमैप को प्रस्तुत किया। ये दोनों विकास देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता और आधुनिक सुरक्षा संप्रभुता के लिए ऐतिहासिक कदम हैं।
1. डीआरडीओ का ‘विक्रम VT-21’: सोवियत काल के बीएमपी-2 की जगह लेगा नया स्वदेशी बख्तरबंद वाहन
क्या हुआ?
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (VRDE), अहिल्यानगर (अहमदनगर) द्वारा निजी उद्योग भागीदारों—भारत फोर्ज लिमिटेड और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL)—के साथ संयुक्त रूप से विकसित किए जा रहे अत्याधुनिक बख्तरबंद वाहन विक्रम VT-21 (Vikram VT-21) के पहिएदार (Wheeled) संस्करण ने विकास परीक्षणों के दौरान सभी परिचालन मानदंडों को पूरा कर लिया है। अब भारतीय सेना इस प्लेटफॉर्म का विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों (रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और अत्यधिक ऊंचाई वाले लद्दाख/सिक्किम क्षेत्रों) में व्यापक फील्ड ट्रायल शुरू करेगी। सेना द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद इसे वर्ष 2029 तक सेवा में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
पृष्ठभूमि एवं तकनीकी विशेषताएं
भारतीय सेना का मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री दस्ता 1980 के दशक से सोवियत मूल के बीएमपी-2 ‘सारथ’ (BMP-2 Sarath) लड़ाकू वाहनों पर निर्भर रहा है, जो अब पुराने पड़ चुके हैं। इसके प्रतिस्थापन के लिए भारतीय सेना का ‘फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल’ (FICV) कार्यक्रम लंबे समय से विचाराधीन था। विक्रम VT-21 को ‘डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर’ (DCPP) मॉडल के तहत मात्र तीन वर्षों के भीतर डिजाइन और विकसित किया गया है।
- दो संस्करण: विक्रम VT-21 दो प्रारूपों में तैयार किया गया है—8×8 व्हील्ड (सड़क और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में तीव्र गति व सुगम रखरखाव हेतु) और ट्रैक्ड (बीहड़ एवं अत्यधिक दुर्गम भूभागों में बेहतर पकड़ और स्थिरता हेतु)।
- उभयचर (Amphibious) क्षमता: इसमें हाइड्रो-जेट प्रणोदन प्रणाली लगी है, जिससे यह वाहन भारी बुर्ज (टुरेट) सहित बिना किसी बाहरी मदद के नदियों, नालों और दलदली क्षेत्रों को पार कर सकता है।
- शस्त्र प्रणाली: वाहन में मानवरहित (क्रूलेस) 30 मिमी ऑटो-कैनन बुर्ज, तीसरी पीढ़ी की स्वदेशी ‘नाग एमके-2’ एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM), और 7.62 मिमी समाक्षीय (कोएक्सियल) पीकेटी मशीन गन सुसज्जित है।
- सुरक्षा मानक: इसे नाटो के STANAG लेवल 4 और लेवल 5 मानकों के अनुसार मॉड्यूलर आर्मर से लैस किया गया है, जो मिसाइल हमलों, खान विस्फोटों (माइन ब्लास्ट) और आर्टिलरी छर्रों से क्रू को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें वर्तमान में 65% स्वदेशी सामग्री है, जिसे बढ़ाकर 90% करने का लक्ष्य है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
विक्रम VT-21 भारत के बख्तरबंद वाहन निर्माण में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (डीसीपीपी मॉडल) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। वैश्विक स्तर पर यह अमेरिकी सेना के ब्रैडली (Bradley), जर्मन प्यूमा (Puma) और दक्षिण कोरिया के K21 बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों के समकक्ष तकनीकी क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करता है।
2. भारत का पोस्ट-क्वांटम और एआई-संचालित 6G रोडमैप: दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि (TTDF) की प्रगति
क्या हुआ?
दूरसंचार विभाग (DoT) ने ईएसटीआईसी 2026 में ‘इंटेलिजेंट नेटवर्क्स एंड क्वांटम कम्युनिकेशन’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र में राष्ट्रीय डिजिटल संप्रभुता के लिए 6G और क्वांटम-सुरक्षित संचार पर महत्वपूर्ण समीक्षा प्रस्तुत की। दूरसंचार विभाग ने जानकारी दी कि दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि (TTDF) के तहत अब तक प्रयोगशाला से बाजार तक स्वदेशी समाधानों को ले जाने के लिए ₹500 करोड़ की लागत वाली 130 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। इसके साथ ही, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को लाइव नेटवर्क में परीक्षण करने और वैश्विक मानकीकरण में भाग लेने हेतु ₹200 करोड़ की ‘प्रौद्योगिकी विकास और निवेश संवर्धन’ (TDIP) योजना को 2031 तक के लिए नवीनीकृत किया गया है।
पृष्ठभूमि और क्वांटम-सुरक्षित संचार की आवश्यकता
क्वांटम कंप्यूटरों के आगामी युग में पारंपरिक एन्क्रिप्शन विधियां (जैसे RSA) अप्रभावी हो सकती हैं। इसे देखते हुए भारत ने ‘पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी’ (PQC) और ‘क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन’ (QKD) आधारित सुरक्षित संचार नेटवर्क पर काम तेज कर दिया है। मार्च 2023 में जारी ‘भारत 6G विज़न डॉक्यूमेंट’ के तहत भारत ने 2030 तक अगली पीढ़ी की 6G दूरसंचार तकनीक के डिजाइन और विकास में वैश्विक अग्रणी बनने का संकल्प लिया है।
- त्रिसूत्रीय सिद्धांत (Triple-Pillar Vision): भारत का 6G रोडमैप सामर्थ्य (Affordability), स्थिरता (Sustainability) और सर्वव्यापकता (Ubiquity) के तीन स्तंभों पर आधारित है।
- तकनीकी क्षमता: 6G नेटवर्क टेराहर्ट्ज़ (THz) स्पेक्ट्रम (>100 GHz) पर काम करेगा, जिसमें डेटा ट्रांसफर की सैद्धांतिक गति 1 टीबीपीएस (Tbps) तक और विलंबता (Latency) 1 माइक्रोसेकंड से कम होगी। यह 5G की तुलना में लगभग 1000 गुना अधिक तेज़ होगा।
- एआई-नेटिव नेटवर्क: भविष्य के 6G ढांचे में ऑटोनॉमस रूटिंग, 3D होलोग्राफिक संचार, सटीक सुदूर सर्जरी (रिमोट रोबोटिक सर्जरी) और किनारे-क्लाउड (एज-क्लाउड) अनुकूलन सीधे अंतर्निहित होंगे।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
भारत 6G एलायंस (B6GA) उद्योग, शिक्षा जगत और राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों को एक साथ जोड़ रहा है। नीति आयोग और दूरसंचार विभाग का अनुमान है कि 2035 तक 6G आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का योगदान करेगी, और वैश्विक 6G पेटेंट में कम से कम 10% योगदान भारत का होगा।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विक्रम VT-21 विकासक | वीआरडीई (DRDO), भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स |
|---|---|
| प्रतिस्थापित होने वाला प्लेटफॉर्म | सोवियत मूल का बीएमपी-2 सारथ (BMP-2 Sarath) |
| सेना में संभावित शामिल होने का वर्ष | 2029 |
| सुरक्षा मानक (कवच) | नाटो STANAG स्तर 4 और 5 |
| टीटीडीएफ (TTDF) का पूर्ण रूप | टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (दूरसंचार विभाग) |
| भारत 6G लक्ष्य वर्ष | 2030 |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 हाल ही में परीक्षणों में सफल रहा अगली पीढ़ी का इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल ‘विक्रम VT-21’ मुख्य रूप से डीआरडीओ की किस प्रयोगशाला द्वारा विकसित किया गया है?
Q2 भारतीय सेना के ‘फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल’ (FICV) कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य निम्नलिखित में से किस पुराने सैन्य वाहन को प्रतिस्थापित करना है?
Q3 ‘विक्रम VT-21’ बख्तरबंद लड़ाकू वाहन में मुख्य एंटी-टैंक मारक क्षमता के लिए किस स्वदेशी मिसाइल प्रणाली को एकीकृत किया गया है?
Q4 दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा स्वदेशी दूरसंचार अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए संचालित निधि का क्या नाम है?
Q5 भारत सरकार के ‘भारत 6G विज़न डॉक्यूमेंट’ के अनुसार देश को 6G तकनीक के डिजाइन, विकास और परिनियोजन में किस वर्ष तक वैश्विक अग्रणी बनाने का लक्ष्य रखा गया है?







