अर्थव्यवस्था

FEMA कंपाउंडिंग नियमों में बड़ा बदलाव: RBI अधिकारियों की वित्तीय शक्तियां बढ़ीं, B-READY सुधार तेज

केंद्र सरकार और RBI ने FEMA कंपाउंडिंग नियमों में संशोधन कर मौद्रिक सीमाएं बढ़ाई हैं। इसके साथ ही विश्व बैंक के नए B-READY सूचकांक व बैंकिंग नियमों पर विनियामक कदम तेज हुए हैं।

⭐ मुख्य बिंदु

  • FEMA कंपाउंडिंग नियम 2024 ने वर्ष 2000 के पुराने शमन नियमों को पूरी तरह प्रतिस्थापित किया।
  • RBI के सहायक महाप्रबंधक (AGM) की कंपाउंडिंग सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹60 लाख कर दी गई।
  • मुख्य महाप्रबंधक (CGM) अब ₹5 करोड़ से अधिक के विदेशी मुद्रा उल्लंघन मामलों का शमन करेंगे।
  • FEMA की धारा 15 के तहत कंपाउंडिंग की शक्ति प्राप्त है, जबकि धारा 3(a) के उल्लंघन ED के अधीन हैं।
  • विश्व बैंक के पुराने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की जगह नया सूचकांक ‘B-READY’ प्रभावी हुआ है।
  • भारत में B-READY की तैयारियों के लिए DPIIT (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय) नोडल विभाग है।
  • 10 वर्ष से निष्क्रिय बैंक खातों की लावारिस राशि को BR Act की धारा 26A के तहत DEA फंड में भेजना अनिवार्य है।

FEMA कंपाउंडिंग नियम 2024: विदेशी निवेश व व्यापार सुगमता के लिए नया ढांचा

विदेशी मुद्रा प्रवाह और व्यावसायिक सुगमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के तहत कंपाउंडिंग कार्यवाही नियमों में व्यापक फेरबदल लागू किया है। यह कदम ‘विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग कार्यवाही) नियम, 2000’ का स्थान लेता है। नए नियमों का मुख्य उद्देश्य विदेशी विनिमय से जुड़े तकनीकी व प्रक्रियात्मक उल्लंघनों का त्वरित, पारदर्शी और विवाद-रहित समाधान करना है।

क्या हुआ: मुख्य विनियामक परिवर्तन

संशोधित नियमों के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक के विभिन्न स्तर के अधिकारियों की वित्तीय अधिकारिता (Pecuniary Jurisdiction) में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जिससे मामलों का निपटान क्षेत्रीय व त्वरित स्तर पर हो सके:

  • सहायक महाप्रबंधक (AGM): पहले ₹10 लाख तक के उल्लंघन के मामलों का निपटारा कर सकते थे, जिसे बढ़ाकर अब ₹60 लाख कर दिया गया है।
  • उप महाप्रबंधक (DGM): अधिकार सीमा ₹40 लाख से बढ़ाकर ₹2.5 करोड़ की गई है।
  • महाप्रबंधक (GM): सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ की गई है।
  • मुख्य महाप्रबंधक (CGM): ₹5 करोड़ से अधिक के मामलों के कंपाउंडिंग का दायित्व संभालेंगे (पहले यह ₹1 करोड़ से अधिक पर लागू था)।
  • डिजिटल प्रक्रिया: कंपाउंडिंग आवेदनों को सुगम बनाने के लिए रिज़र्व बैंक के ‘प्रवाह’ (PRAVAAH - Platform for Regulatory Application, VAlidation and AutHorisation) पोर्टल के माध्यम से डिजिटल आवेदन और शुल्क भुगतान की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।

पृष्ठभूमि: कंपाउंडिंग (शमन) व्यवस्था क्या है?

कंपाउंडिंग एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है, जिसमें कोई व्यक्ति या कॉर्पोरेट संस्था FEMA प्रावधानों के अनपेक्षित उल्लंघन को स्वीकार कर एक निर्धारित शुल्क चुकाकर कानूनी कार्यवाही से मुक्ति प्राप्त करती है। FEMA, 1999 की धारा 15 रिज़र्व बैंक को धारा 13 के तहत दंडनीय अधिकांश उल्लंघनों के शमन की शक्ति देती है। हालांकि, धारा 3(a) से जुड़े गैर-अधिकृत विदेशी मुद्रा लेन-देन के मामलों की जांच व शमन प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकार क्षेत्र में आता है।

विश्व बैंक का नया मूल्यांकन ढांचा ‘B-READY’ और भारत की सुधार रणनीति

विश्व बैंक द्वारा पुराने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) सूचकांक को बंद करने के बाद नया कॉर्पोरेट मूल्यांकन ढांचा ‘बिजनेस रेडी’ (B-READY) लागू किया गया है। भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) को भारत में इस व्यवस्था के क्रियान्वयन और विनियामक समन्वय के लिए नोडल विभाग नियुक्त किया गया है।

B-READY के प्रमुख स्तंभ और परीक्षा उपयोगी पहलू

यह नया सूचकांक किसी उद्यम के पूरे जीवन चक्र (Life Cycle) को 10 विषयों और 3 प्रमुख स्तंभों के आधार पर मापता है:

स्तंभ (Pillar)कार्यक्षेत्रउद्देश्य
Pillar I: विनियामक ढांचाश्रम, व्यापार प्रवेश, उपयोगिताएं, अनुबंधकानूनों और विनियामक नियमों की गुणवत्ता की जांच
Pillar II: सार्वजनिक सेवाएंडिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंगल विंडो, संस्थानसरकारों द्वारा दी जाने वाली सेवाओं की प्रभावशीलता
Pillar III: परिचालन दक्षतालागत, अनुपालन में लगने वाला समय, पारदर्शिताव्यवसायों द्वारा वास्तविक अनुपालन सुगमता

DPIIT सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर विनियामक बोझ घटाने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (QCOs) में रियायतें दे रहा है, जिससे भारत B-READY मूल्यांकन में अपनी स्थिति को मजबूत कर सके।

सहकारी बैंकों पर विनियामक सख्ती: DEA फंड और अनुपालन

बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम (BR Act), 1949 की धारा 26A और धारा 56 के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले सहकारी बैंकों पर आर्थिक दंड अधिरोपित किया है।

जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (DEA) निधि का महत्व

बैंकिंग विनियमन कानून के अनुसार, यदि किसी बैंक खाते में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कोई परिचालन नहीं हुआ है, तो उस लावारिस राशि (Unclaimed Deposit) को ब्याज सहित रिज़र्व बैंक के ‘डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस Fund’ (DEAF) में अंतरित करना अनिवार्य होता है। ग्राहकों की सुविधा के लिए RBI ने ‘UDGAM’ (Unclaimed Deposits - Gateway to Access inforMation) पोर्टल भी संचालित किया है ताकि नागरिक विभिन्न बैंकों में पड़े अपने लावारिस खातों को आसानी से ट्रैक कर सकें।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

FEMA लागू होने का वर्ष1 जून 2000 (FEMA 1999)
FEMA कंपाउंडिंग की धाराधारा 15 (FEMA, 1999)
B-READY का जारीकर्ता संस्थानविश्व बैंक (World Bank Group)
B-READY के लिए भारत का नोडल विभागDPIIT (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय)
DEA Fund का विधिक प्रावधानधारा 26A, बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949
लावारिस जमा ट्रैकिंग पोर्टलUDGAM पोर्टल (RBI द्वारा विकसित)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के तहत उल्लंघनों के शमन (Compounding) का प्रावधान किस धारा में किया गया है?

Q2 संशोधित विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग कार्यवाही) नियम के तहत RBI के सहायक महाप्रबंधक (AGM) की मौद्रिक अधिकारिता सीमा कितनी कर दी गई है?

Q3 विश्व बैंक द्वारा ‘Ease of Doing Business’ रिपोर्ट को बंद करने के बाद शुरू किए गए नए व्यावसायिक मूल्यांकन ढांचे का नाम क्या है?

Q4 बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की किस धारा के अंतर्गत बैंकों द्वारा 10 वर्ष से निष्क्रिय जमाओं को DEA फंड में अंतरित किया जाता है?

Q5 भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विभिन्न बैंकों में पड़ी लावारिस जमा (Unclaimed Deposits) को खोजने हेतु नागरिकों के लिए कौन सा पोर्टल शुरू किया गया है?

स्रोत