एनएसई सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर NSDC का पदार्पण और बैंकों के परिचालन जोखिम पर RBI के नए मानक
NSDC ने NSE सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर ZCZP बॉन्ड के जरिए पदार्पण किया जिसमें नाबार्ड ने ₹4 करोड़ का निवेश किया। वहीं RBI ने बैंकों के परिचालन जोखिम के लिए बासेल-III पूंजी मानक जारी किए।
⭐ मुख्य बिंदु
- NSDC ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर ZCZP इंस्ट्रूमेंट्स के साथ शुरुआत की।
- नाबार्ड ने NSDC के इस पहले सामाजिक निर्गम में ₹4 करोड़ का निवेश किया है।
- यह परियोजना मध्य प्रदेश के 600 ग्रामीण युवाओं को जर्मनी और जापान में रोजगार के लिए तैयार करेगी।
- जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP) बिना ब्याज और बिना मूलधन वापसी वाला विशुद्ध सामाजिक वित्तीय साधन है।
- भारत में सोशल स्टॉक एक्सचेंज की रूपरेखा इशात हुसैन समिति की सिफारिशों पर आधारित है।
- आरबीआई ने वाणिज्यिक बैंकों के लिए परिचालन जोखिम पर न्यूनतम पूंजी आवश्यकताओं के नए नियम जारी किए।
- नया ढांचा पूर्ववर्ती अपरिपक्व दृष्टिकोणों को हटाकर बासेल-III मानकीकृत मापन दृष्टिकोण (SMA) को लागू करता है।
- भारत में बैंकों के लिए न्यूनतम पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) 11.5% (9% नियामक + 2.5% CCB) अनिवार्य है।
भारतीय वित्तीय बाजार और बैंकिंग विनियामक व्यवस्था में हाल ही में दो अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव सामने आए हैं। एक ओर सामाजिक वित्तपोषण (Social Financing) को गति देने के लिए नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) ने एनएसई सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) पर ‘जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल’ (ZCZP) इंस्ट्रूमेंट्स जारी किए हैं, तो दूसरी ओर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वाणिज्यिक बैंकों की वित्तीय दृढ़ता सुनिश्चित करने के लिए परिचालन जोखिम (Operational Risk) पर न्यूनतम पूंजी आवश्यकताओं के संशोधित दिशानिर्देश अधिसूचित किए हैं।
1. NSDC का सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर पदार्पण: नाबार्ड का निवेश और ZCZP ढांचा
क्या हुआ?
केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तत्वावधान में नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) प्लेटफॉर्म पर ऐतिहासिक शुरुआत की। इस अवसर पर एनएसई की घंटी बजाकर लिस्टिंग का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस निर्गम के तहत NSDC ने अपना पहला ‘जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल’ (Zero Coupon Zero Principal - ZCZP) इंस्ट्रूमेंट जारी किया। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) ने इस पहल में ₹4 करोड़ की वित्तीय सहायता (सब्सक्रिप्शन) प्रदान की है।
यह ₹11.25 करोड़ का संयुक्त परिणाम-आधारित मॉडल मध्य प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 600 ग्रामीण युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर (विशेष रूप से जापान और जर्मनी में भाषा व तकनीकी कौशल प्रशिक्षण) प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें मध्य प्रदेश सरकार परिणाम-आधारित वित्तीय सहयोग (Outcome-Linked Funding) प्रदान कर रही है।
पृष्ठभूमि: सोशल स्टॉक एक्सचेंज और ZCZP क्या हैं?
- सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE): भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा अनुमोदित यह एक विशेष खंड (Segment) है, जो सामाजिक उद्यमों (गैर-लाभकारी और लाभकारी संस्थाओं) को पूंजी बाजार से धन जुटाने में सक्षम बनाता है। भारत में SSE की रूपरेखा तैयार करने के लिए वर्ष 2019 में इशात हुसैन समिति का गठन किया गया था।
- जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP): यह प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 के तहत एक विशेष वित्तीय साधन है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस पर निवेशक को कोई ब्याज (Zero Coupon) नहीं मिलता और न ही परिपक्वता पर मूलधन की वापसी (Zero Principal) होती है। यह विशुद्ध रूप से परोपकारी और सामाजिक विकास के उद्देश्य से दिया जाने वाला प्रभावकारी निवेश (Impact Investment) है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- नियामक प्राधिकारी: सोशल स्टॉक एक्सचेंज का विनियमन सेबी (SEBI) द्वारा किया जाता है।
- पात्रता मानदंड: केवल वे गैर-लाभकारी संगठन (NPOs) SSE पर पंजीकृत हो सकते हैं जो कम से कम 3 वर्षों से सक्रिय हों, आयकर छूट (12A/12AB/80G) प्राप्त हों और पिछले वर्ष में न्यूनतम ₹50 लाख का व्यय किया हो।
- वैश्विक रोजगार लिंकेज: इस योजना के तहत कुशल भारतीय युवाओं को विकसित अर्थव्यवस्थाओं की जनसांख्यिकीय जरूरतों (डेमोग्राफिक डेफिसिट) के अनुरूप तैयार कर वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ना है।
2. वाणिज्यिक बैंकों के परिचालन जोखिम पर RBI के संशोधित विनियामक निर्देश
क्या हुआ?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वाणिज्यिक बैंकों के लिए ‘बासेल-III सुधार: परिचालन जोखिम के लिए न्यूनतम पूंजी आवश्यकताएं दिशा-निर्देश 2026’ जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत बैंकों को अप्रत्याशित वित्तीय झटकों और परिचालन विफलताओं से निपटने के लिए एक मजबूत पूंजी बफर बनाए रखना अनिवार्य किया गया है।
पृष्ठभूमि: परिचालन जोखिम और बासेल-III का ढांचा
परिचालन जोखिम (Operational Risk) का तात्पर्य उन वित्तीय हानियों से है जो अपर्याप्त या विफल आंतरिक प्रक्रियाओं, कार्मिकों की गलतियों, साइबर व तकनीकी प्रणालियों के क्रैश होने या बाहरी कानूनी व प्राकृतिक घटनाओं के कारण उत्पन्न होती हैं।
- मानकीकृत मापन दृष्टिकोण (SMA): RBI ने पूर्ववर्ती बुनियादी संकेतक दृष्टिकोण (Basic Indicator Approach) को समाप्त कर नया मानकीकृत दृष्टिकोण लागू किया है, जिसमें बैंक के ‘बिजनेस इंडिकेटर’ (BI) और ऐतिहासिक नुकसान के आंकड़ों के आधार पर पूंजी का निर्धारण किया जाता है।
- बासेल-III का संदर्भ: बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के तहत बासेल समिति द्वारा वैश्विक स्तर पर 2008 के वित्तीय संकट के बाद बासेल-III मानक तय किए गए थे, जिसमें पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) को मजबूत करने पर बल दिया गया।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR): भारत में वाणिज्यिक बैंकों के लिए RBI द्वारा निर्धारित न्यूनतम नियामक CRAR 9% है, जबकि पूंजी संरक्षण बफर (CCB) 2.5% जोड़ने पर कुल न्यूनतम आवश्यकता 11.5% हो जाती है (यह बासेल समिति के 8% मानक से अधिक सख्त है)।
- बासेल मानकों के तीन स्तंभ:
- स्तंभ 1 (Pillar 1): न्यूनतम पूंजी आवश्यकता (क्रेडिट, मार्केट और परिचालन जोखिम)।
- स्तंभ 2 (Pillar 2): विनियामक समीक्षा और आंतरिक पूंजी मूल्यांकन (ICAAP)।
- स्तंभ 3 (Pillar 3): बाजार अनुशासन और अनिवार्य सार्वजनिक खुलासे (Market Discipline)।
| मापदंड | सोशल स्टॉक एक्सचेंज (ZCZP) | परिचालन जोखिम पूंजी (RBI) |
|---|---|---|
| नियामक संस्था | SEBI (प्रतिभूति बाजार) | RBI (बैंकिंग विनियमन) |
| प्रमुख उद्देश्य | सामाजिक प्रभाव और कौशल विकास हेतु वित्तपोषण | बैंकों की वित्तीय सुदृढ़ता और संकट-सहिष्णुता |
| प्रमुख प्रतिभागी | NSDC, नाबार्ड, राज्य सरकारें | अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (SCBs) |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| सोशल स्टॉक एक्सचेंज हेतु गठित समिति | इशात हुसैन समिति (Ishaat Hussain Committee) |
|---|---|
| नाबार्ड (NABARD) की स्थापना | 12 जुलाई 1982 (शिवरामन समिति की सिफारिश पर) |
| ZCZP इंस्ट्रूमेंट की प्रकृति | शून्य कूपन (ब्याज) और शून्य मूलधन वापसी |
| भारत में न्यूनतम CRAR (CCB सहित) | 11.5% (अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक) |
| बासेल समिति का मुख्यालय | बासेल, स्विट्जरलैंड (BIS परिसर) |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) पर जारी होने वाले ‘जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल’ (ZCZP) इंस्ट्रूमेंट्स के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?
Q2 हाल ही में NSDC द्वारा जारी पहले ZCZP निर्गम में किस प्रमुख वित्तीय संस्थान ने ₹4 करोड़ का अंशदान दिया?
Q3 भारत में सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) के विनियामक ढांचे का निर्धारण किस संस्था की सिफारिशों और नियमों के आधार पर किया गया?
Q4 बैंकिंग क्षेत्र में ‘परिचालन जोखिम’ (Operational Risk) का मुख्य स्रोत क्या है?
Q5 आरबीआई के अनुसार भारतीय वाणिज्यिक बैंकों के लिए न्यूनतम पूंजी संरक्षण बफर (CCB) कितना निर्धारित है?







