बिहार विशेष

मोतीपुर चीनी मिल भूमि का औद्योगिक पुनरुद्धार और बिहार में नशा मुक्ति महा-अभियान

बिहार में बंद मोतीपुर चीनी मिल की 151 एकड़ भूमि उद्योगों को आवंटित, राज्यव्यापी नशा मुक्ति महा-अभियान का आगाज और ग्रामीण बैंक कर्मियों हेतु ₹78 करोड़ का समझौता।

⭐ मुख्य बिंदु

  • मुजफ्फरपुर के मोतीपुर स्थित बंद चीनी मिल की 151.58 एकड़ भूमि उद्योग विभाग को गैर-चीनी उद्योगों की स्थापना हेतु हस्तांतरित की गई।
  • किशनगंज के ठाकुरगंज में ₹88.62 करोड़ की इमेज स्टार्च इकाई और गोपालगंज के बैकुंठपुर में ₹97.80 करोड़ के अनाज आधारित इथेनॉल प्लांट को मंजूरी मिली।
  • बिहार सरकार ने 27 अक्टूबर से 26 नवंबर 2026 तक राज्यव्यापी नशा मुक्ति महा-अभियान की शुरुआत की।
  • अभियान का मुख्य फोकस सिंथेटिक व नशीले पदार्थों की अंतरराज्यीय तस्करी पर कठोर नियंत्रण और पंचायत स्तर पर जन-जागरूकता है।
  • यह अभियान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 (लोक स्वास्थ्य और मादक पदार्थों का निषेध) के प्रावधानों के अनुरूप संचालित है।
  • केंद्रीय श्रम मंत्रालय के सुलह प्रयासों से बिहार ग्रामीण बैंक और कर्मियों के बीच ₹77.69 करोड़ के वित्तीय पैकेज पर समझौता हुआ।
  • इस समझौते से बिहार ग्रामीण बैंक के 10,900 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी लाभांवित होंगे।

बिहार में औद्योगिक अधोसंरचना के विस्तार, सामाजिक सुधार और वित्तीय संस्थानों में सुशासन को बढ़ावा देने के लिए हाल के दिनों में कई दूरगामी कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार ने जहां बंद पड़ी सार्वजनिक इकाइयों की भूमि को आधुनिक विनिर्माण के लिए पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है, वहीं सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर 27 अक्टूबर 2026 से एक माह का नशा मुक्ति महा-अभियान प्रारंभ किया है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय श्रम मंत्रालय के हस्तक्षेप से राज्य के ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र में लंबे समय से लंबित श्रम विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित हुआ है। ये सभी कदम BPSC एवं अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत प्रासंगिक हैं।

1. मोतीपुर चीनी मिल परिसर का औद्योगिक कायाकल्प और नए विनिर्माण निवेश

क्या हुआ?

बिहार मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर में बंद पड़ी बिहार राज्य चीनी निगम लिमिटेड (Bihar State Sugar Corporation Ltd) की कुल 266 एकड़ भूमि के पुनरुद्धार को मंजूरी दी है। इसमें से 151.58 एकड़ भूमि उद्योग विभाग को ‘एज इज, व्हेयर इज’ (as is, where is) आधार पर हस्तांतरित करने का फैसला लिया गया है, ताकि गैर-चीनी औद्योगिक इकाइयों और विनिर्माण संयंत्रों की स्थापना की जा सके। शेष 115.08 एकड़ भूमि चीनी मिल और उससे जुड़े उत्पादों के लिए आरक्षित रहेगी।

इसके अतिरिक्त, उत्तर बिहार में एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने निम्नलिखित बड़े औद्योगिक प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई है:

  • इमेज स्टार्च इकाई (ठाकुरगंज, किशनगंज): ₹88.62 करोड़ के पूंजी निवेश से मक्का और कृषि उत्पादों पर आधारित स्टार्च उत्पादन संयंत्र की स्थापना को मंजूरी दी गई, जिससे प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।
  • अनाज-आधारित इथेनॉल संयंत्र (बैकुंठपुर, गोपालगंज): ₹97.80 करोड़ के निवेश से नए अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन प्लांट को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई।

पृष्ठभूमि एवं महत्व

बिहार में कभी 30 से अधिक चीनी मिलें संचालित थीं, जो राज्य के कृषि-उद्योग का मुख्य आधार थीं। समय के साथ अधिकांश मिलें बंद हो गईं और उनकी बेशकीमती जमीन अनुपयोगी पड़ी रही। राज्य सरकार की नई नीति के तहत बंद मिलों की जमीन को बियाडा (BIADA) अथवा उद्योग विभाग को सौंपकर फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्युटिकल और टेक्सटाइल पार्कों में बदला जा रहा है। मुजफ्फरपुर का मोतीपुर क्षेत्र पहले से ही मेगा फूड पार्क और इथेनॉल इकाइयों के लिए विकसित हो रहा है, ऐसे में यह अतिरिक्त भूमि औद्योगिक विस्तार को गति देगी।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु

  • मुजफ्फरपुर की औद्योगिक स्थिति: मोतीपुर में बिहार का पहला मेगा फूड पार्क और एग्रो-क्लस्टर स्थापित है।
  • इथेनॉल नीति: बिहार वर्ष 2021 में इथेनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति (Ethanol Promotion Policy) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था।
  • भौगोलिक महत्त्व: किशनगंज का ठाकुरगंज चिकन-नेक कॉरिडोर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के समीप स्थित होने के कारण पूर्वोत्तर भारत में माल आपूर्ति के लिए सामरिक औद्योगिक केंद्र बनता जा रहा है।

2. बिहार में नशा मुक्ति के विरुद्ध राज्यव्यापी एक माह का महा-अभियान

क्या हुआ?

बिहार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग द्वारा 27 अक्टूबर 2026 से 26 नवंबर 2026 तक पूरे राज्य में एक माह लंबा विशेष नशा मुक्ति महा-अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य मादक पदार्थों (सिंथेटिक ड्रग्स, चरस, गांजा, हेरोइन और अफीम) की अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय तस्करी पर अंकुश लगाना तथा युवाओं में जागरूकता फैलाना है।

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में नारकोटिक्स जब्ती में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य में चरस की जब्ती 2024 में 282 किलोग्राम से बढ़कर 2025 में 400 किलोग्राम तक पहुंच गई। इसी प्रकार हेरोइन की जब्ती 42 किलोग्राम से बढ़कर 65 किलोग्राम और अफीम की जब्ती 77 किलोग्राम दर्ज की गई। अभियान के तहत सभी 38 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्तर पर प्रभात फेरी, नुक्कड़ नाटक और वार्ड सभाओं का आयोजन किया जा रहा है।

संविधान और नीतिगत जुड़ाव (Static GK Linkage)

यह अभियान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 (राज्य के नीति निदेशक तत्व - DPSP) के संवैधानिक अधिदेश को पूरा करने की दिशा में एक कदम है। अनुच्छेद 47 राज्यों को निर्देश देता है कि वे लोक स्वास्थ्य के सुधार को अपने प्राथमिक कर्तव्यों में गिनें और स्वास्थ्य के लिए हानिकर मादक पेयों तथा औषधियों के उपभोग का प्रतिषेध (मद्यनिषेध) करने का प्रयास करें। बिहार में 5 अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है, जिसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम लागू किया गया था।

3. बिहार ग्रामीण बैंक समझौता: 10,900 से अधिक कर्मियों को ₹78 करोड़ का लाभ

क्या हुआ?

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय के तत्वावधान में सहायक श्रमायुक्त (केंद्रीय), पटना के सुलह प्रयासों से बिहार ग्रामीण बैंक और उसके कर्मचारी संगठनों के बीच दो प्रमुख औद्योगिक विवादों का ऐतिहासिक समाधान हुआ। इस द्विपक्षीय समझौते के तहत बैंक के 10,900 से अधिक कर्मियों को ₹77.69 करोड़ (लगभग ₹78 करोड़) के संचयी वित्तीय लाभ प्राप्त होंगे।

प्रावधानविवरण
कुल लाभांवित कर्मचारी10,900 से अधिक (8,400 अधिकारी + 2,500 कर्मचारी)
अधिकारी संघ समझौता (22 अक्टूबर)₹67.17 करोड़ का वित्तीय आवंटन (PLI, कार्यवाहक भत्ता, वेतन वृद्धि)
कर्मचारी संगठन समझौता (23 अक्टूबर)₹10.52 करोड़ (₹9.02 करोड़ का आवर्ती वार्षिक लाभ सहित)
प्रमुख सेवा सुधार12वें द्विपक्षीय समझौते का क्रियान्वयन, दिव्यांग कर्मियों का परिवहन भत्ता, पारदर्शी पदोन्नति

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) और परीक्षा तथ्य

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना एम. नरसिम्हम समिति (1975) की सिफारिशों के आधार पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के तहत की गई थी। इनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, लघु व्यापार और कारीगरों को संस्थागत ऋण सुलभ कराना है। RRBs में केंद्र सरकार (50%), प्रायोजक बैंक (35%) और राज्य सरकार (15%) की हिस्सेदारी होती है। बिहार में दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक (प्रायोजक: पंजाब नेशनल बैंक) और उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक (प्रायोजक: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया) प्रमुख ग्रामीण बैंक संस्थाएं हैं।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

मोतीपुर मिल भूमि हस्तांतरण151.58 एकड़ (उद्योग विभाग हेतु)
मोतीपुर चीनी मिल का जिलामुजफ्फरपुर, बिहार
नशा मुक्ति अभियान अवधि27 अक्टूबर से 26 नवंबर 2026
शराबबंदी का संवैधानिक आधारअनुच्छेद 47 (राज्य के नीति निदेशक तत्व)
बिहार ग्रामीण बैंक समझौता राशि₹77.69 करोड़ (लगभग ₹78 करोड़)
RRB स्थापना की अनुशंसा समितिएम. नरसिम्हम समिति (1975)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 हाल ही में बिहार कैबिनेट द्वारा गैर-चीनी उद्योगों के लिए 151.58 एकड़ भूमि हस्तांतरित की गई बंद मोतीपुर चीनी मिल किस जिले में स्थित है?

Q2 बिहार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग द्वारा 27 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ नशा मुक्ति महा-अभियान कब तक संचालित किया जाएगा?

Q3 भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद राज्य को हानिकारक मादक पेयों और औषधियों के उपभोग पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश देता है?

Q4 अक्टूबर 2026 में केंद्रीय श्रम मंत्रालय के सुलह प्रयासों से बिहार ग्रामीण बैंक के 10,900 से अधिक कर्मियों के लिए कितने वित्तीय लाभ का समझौता हुआ?

Q5 भारत में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) की स्थापना किस समिति की अनुशंसा के आधार पर वर्ष 1975 में प्रारंभ की गई थी?

स्रोत