पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना को मंजूरी, भर्ती नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और FCI में पूंजी निवेश
केंद्रीय कैबिनेट ने मेधावी छात्रों के लिए पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना और FCI में ₹10,700 करोड़ की इक्विटी को मंजूरी दी। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती नियमों पर बड़ा फैसला सुनाया।
⭐ मुख्य बिंदु
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उच्च शिक्षा के लिए ₹3,600 करोड़ के परिव्यय के साथ पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना को स्वीकृति दी।
- पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के तहत देश के 860 गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र बिना गारंटी शिक्षा ऋण प्राप्त कर सकेंगे।
- ₹8 लाख तक वार्षिक पारिवारिक आय वाले विद्यार्थियों को ₹10 लाख तक के ऋण पर 3% ब्याज अनुदान मिलेगा।
- सुप्रीम कोर्ट की 5-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने फैसला दिया कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता नियम नहीं बदले जा सकते।
- शीर्ष अदालत ने यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 के आलोक में सुनाया और के. मंजूश्री मामले के निर्णय को बरकरार रखा।
- सीसीईए ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) में कार्यशील पूंजी के रूप में ₹10,700 करोड़ की इक्विटी पूंजी डालने की मंजूरी दी।
- एफसीआई में यह इक्विटी वेज़ एंड मीन्स एडवांस (WMA) को इक्विटी में परिवर्तित करके दी जाएगी, जिससे निगम का ब्याज बोझ कम होगा।
भारत सरकार के नीतिगत निर्णयों और न्यायपालिका के ऐतिहासिक आदेशों के संदर्भ में राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उच्च शिक्षा को सुलभ बनाने हेतु पीएम-विद्यालक्ष्मी (PM-Vidyalaxmi) योजना और देश की खाद्य सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) में इक्विटी निवेश को स्वीकृति प्रदान की है। इसी क्रम में, सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने वाला युगांतरकारी फैसला सुनाया है।
1. उच्च शिक्षा के लिए नई केंद्रीय क्षेत्रक योजना: पीएम-विद्यालक्ष्मी
क्या हुआ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मेधावी विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से एक नई केंद्रीय क्षेत्रक योजना (Central Sector Scheme) ‘पीएम-विद्यालक्ष्मी’ को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत देश के शीर्ष 860 उच्च शिक्षण संस्थानों (QHEIs) में प्रवेश पाने वाले छात्रों को बिना किसी गारंटी और बिना किसी संपार्श्विक (Collateral-free and Guarantor-free) के शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2024-25 से 2030-31 तक की अवधि हेतु ₹3,600 करोड़ का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है।
योजना के मुख्य प्रावधान
- क्रेडिट गारंटी: ₹7.5 लाख तक के ऋण पर भारत सरकार द्वारा बैंकों को 75% की क्रेडिट गारंटी प्रदान की जाएगी।
- ब्याज सब्सिडी (Interest Subvention): जिन परिवारों की वार्षिक आय ₹8 लाख तक है और जो किसी अन्य सरकारी छात्रवृत्ति का लाभ नहीं ले रहे हैं, उन्हें मोरटोरियम अवधि के दौरान ₹10 लाख तक के ऋण पर 3% ब्याज अनुदान दिया जाएगा।
- संस्थानों का चयन: राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) के अंतर्गत समग्र और विभिन्न श्रेणियों में शीर्ष 100 रैंक वाले संस्थान तथा राज्य सरकारों के शीर्ष 101 से 200 रैंक वाले संस्थान इसके दायरे में आएंगे।
- पारदर्शी डिजिटल प्रणाली: आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने हेतु ‘पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल’ शुरू किया जाएगा, जिसमें ई-वाउचर और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) का उपयोग होगा।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) की सिफारिशों के अनुरूप है, जिसमें सार्वजनिक व निजी दोनों उच्च शिक्षण संस्थानों में मेधावी छात्रों के लिए वित्तीय सहायता तंत्र विकसित करने पर बल दिया गया था।
2. भर्ती नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का ऐतिहासिक फैसला
क्या हुआ?
भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने ‘तेज प्रकाश पाठक व अन्य बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय’ मामले में सर्वसम्मति से निर्णय दिया कि सरकारी नौकरियों के लिए चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद ‘खेल के नियम बीच में नहीं बदले जा सकते’ (Rules of the game cannot be changed midway)।
फैसले के मुख्य आधार व पृष्ठभूमि
यह मामला राजस्थान उच्च न्यायालय में 13 अनुवादक (Translator) पदों की भर्ती से संबंधित था, जहां परीक्षा प्रक्रिया के बीच में न्यूनतम अर्हता अंक (कट-ऑफ) तय कर दिए गए थे। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि:
- भर्ती प्रक्रिया रिक्तियों के विज्ञापन जारी होने के साथ ही शुरू मानी जाती है।
- चयन सूची में स्थान पाने की पात्रता शर्तें (Eligibility Criteria) चयन प्रक्रिया के दौरान तब तक नहीं बदली जा सकतीं, जब तक कि सेवा नियमावली में इसका स्पष्ट वैधानिक प्रावधान न हो।
- यदि कोई परिवर्तन नियमों के तहत मान्य भी हो, तो उसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (लोक नियोजन में अवसर की समता) की गैर-मनमानेपन (Non-arbitrariness) की कसौटी पर खरा उतरना होगा।
संविधान पीठ ने 2008 के के. मंजूश्री बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में प्रतिपादित सिद्धांत को सही ठहराया और कहा कि किसी भी भर्ती संस्था को प्रक्रिया के मध्य में मनमाने मानदंड तय करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
3. भारतीय खाद्य निगम (FCI) में ₹10,700 करोड़ का इक्विटी पूंजी निवेश
क्या हुआ?
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने कार्यशील पूंजी (Working Capital) की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India - FCI) में ₹10,700 करोड़ की इक्विटी पूंजी निवेश को मंजूरी दी है। यह पूंजी ‘वेज़ एंड मीन्स एडवांस’ (Ways and Means Advance - WMA) को इक्विटी में परिवर्तित करके प्रदान की जाएगी।
उद्देश्य एवं प्रभाव
इस पूंजी निवेश से एफसीआई की अल्पकालिक उधारी (Short-term borrowings) पर निर्भरता कम होगी, जिससे निगम पर ब्याज का बोझ घटेगा और अंततः केंद्र सरकार के खाद्य सब्सिडी बिल में कमी आएगी। इससे किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खाद्यान्न खरीद और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के प्रभावी क्रियान्वयन को गति मिलेगी।
| संस्था | स्थापना वर्ष | संबद्ध अधिनियम | नोडल मंत्रालय |
|---|---|---|---|
| भारतीय खाद्य निगम (FCI) | 1965 (अधिनियम 1964) | खाद्य निगम अधिनियम, 1964 | उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पीएम-विद्यालक्ष्मी कुल परिव्यय | ₹3,600 करोड़ (2024-25 से 2030-31) |
|---|---|
| क्रेडिट गारंटी सीमा (पीएम-विद्यालक्ष्मी) | ₹7.5 लाख तक के ऋण पर 75% |
| ब्याज सब्सिडी आय सीमा | वार्षिक पारिवारिक आय ₹8 लाख तक |
| संविधान पीठ का ऐतिहासिक वाद | तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान उच्च न्यायालय |
| FCI में स्वीकृत इक्विटी निवेश | ₹10,700 करोड़ |
| FCI की स्थापना वर्ष | 1965 (खाद्य निगम अधिनियम, 1964) |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 हाल ही में स्वीकृत ‘पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना’ के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
Q2 पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के तहत 3% ब्याज सब्सिडी का लाभ प्राप्त करने के लिए अधिकतम वार्षिक पारिवारिक आय सीमा कितनी तय की गई है?
Q3 सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने किस वाद में यह व्यवस्था दी कि ‘चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद खेल के नियम बीच में नहीं बदले जा सकते’?
Q4 आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) में कितनी इक्विटी पूंजी डालने की मंजूरी दी है?
Q5 भारतीय खाद्य निगम (FCI) की स्थापना किस अधिनियम के तहत की गई थी?







